झारखंड में धान खरीद के लिए जमीन सत्यापन और ई-केवाईसी अनिवार्य करने का प्रस्ताव

खाद्य आपूर्ति विभाग के प्रस्ताव को मंत्री की मंजूरी मिल गई है। कैबिनेट से स्वीकृति मिलने पर किसानों को 30 नवंबर तक जमीन सत्यापन और ई-केवाईसी पूरा करना होगा।

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झारखंड में सरकारी धान खरीद व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव

झारखंड में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदने की प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी है। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने नई व्यवस्था का प्रस्ताव बनाया है, जिसे विभागीय मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की मंजूरी मिल चुकी है। प्रस्ताव अब कैबिनेट के समक्ष भेजा जाएगा और उसकी स्वीकृति के बाद ही नई व्यवस्था लागू होगी।

प्रस्ताव के मुताबिक, सरकार को धान बेचने वाले प्रत्येक किसान को 30 नवंबर तक अपनी जमीन का सत्यापन और ई-केवाईसी पूरा कराना होगा। तय अवधि में दोनों प्रक्रियाएं पूरी नहीं होने पर किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद व्यवस्था के तहत धान नहीं बेच सकेंगे। केवल किसान के रूप में निबंधन करा लेना पर्याप्त नहीं माना जाएगा।

आवेदन के साथ आधार कार्ड या कोई अन्य फोटोयुक्त पहचान पत्र, बैंक खाते का विवरण, जमीन का रकबा तथा खाता-प्लॉट संख्या की जानकारी देनी होगी। मोबाइल नंबर भी देना अनिवार्य होगा। निबंधित किसानों की जमीन का सत्यापन संबंधित अंचल कार्यालय के माध्यम से ई-उपार्जन पोर्टल या केंद्रीय खाद्यान्न अधिप्राप्ति पोर्टल पर किया जाएगा।

खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के लिए जिन किसानों की जमीन का सत्यापन या ई-केवाईसी लंबित है, उन्हें 30 नवंबर तक इसे पूरा करने का समय देने का प्रस्ताव है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने की स्थिति में किसानों को सरकारी केंद्र पर उपज बेचने से पहले इन दस्तावेजी शर्तों का पालन करना होगा।

धान खरीद केंद्रों की निगरानी भी बढ़ाने की योजना है। वजन, स्टॉक रखने और लोडिंग वाले हिस्सों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य किए जाएंगे। इन कैमरों को झारखंड राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम के रांची स्थित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ने का प्रस्ताव है, ताकि खरीद केंद्रों की गतिविधियों पर केंद्रीय स्तर से नजर रखी जा सके।

धान को खरीद केंद्र से राइस मिल और मिलिंग के बाद चावल को निर्धारित डिपो तक ले जाने वाले वाहनों में चालू जीपीएस उपकरण लगाना भी अनिवार्य किया जाएगा। ट्रैकिंग व्यवस्था को कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार, बिना जीपीएस वाले वाहन को परिवहन की अनुमति नहीं मिलेगी।