झारखंड में नवंबर से घर-घर सर्वे, स्कूल से बाहर बच्चों की होगी पहचान

तीन से 18 वर्ष तक के बच्चों का ब्योरा डहर 2.0 ऐप पर दर्ज किया जाएगा। स्कूलों को नौ नवंबर तक अपने सर्वे क्षेत्र की जानकारी अंतिम रूप देनी होगी।

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रांची में बच्चों के हाउसहोल्ड सर्वे से संबंधित प्रतीकात्मक दृश्य

रांची में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए शिशु पंजी अपडेट करने और स्कूल से बाहर रह गए बच्चों की पहचान के उद्देश्य से नवंबर में हाउसहोल्ड सर्वे कराने का निर्देश दिया है। सर्वे के दायरे में तीन से 18 वर्ष तक के बच्चे आएंगे। इसमें पढ़ाई छोड़ चुके, कभी नामांकन नहीं कराने वाले और अन्य कारणों से शिक्षा से दूर बच्चों का विवरण जुटाया जाएगा।

सर्वे का काम डहर 2.0 ऐप के माध्यम से होगा। इसके शुरू होने से पहले स्कूलों को नौ नवंबर तक ऐप पर अपने निर्धारित क्षेत्र की जानकारी दर्ज कर उसे अंतिम रूप देना है। इसके बाद शिक्षक अपने-अपने क्षेत्र के घरों में जाकर बच्चों की उम्र, पढ़ाई की मौजूदा स्थिति और किसी स्कूल से उनके जुड़ाव से संबंधित जानकारी एकत्र करेंगे।

यह अभियान केवल घरों तक सीमित नहीं रहेगा। काम करने वाले या अस्थायी ठिकानों पर रहने वाले बच्चों की पहचान के लिए ईंट-भट्ठों, होटल, ढाबों, दुकानों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और निर्माण स्थलों को भी सर्वे में शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसे बच्चों का विवरण भी दर्ज करना है, जो सामान्य घरेलू सर्वे के दौरान छूट सकते हैं।

सर्वे में दिव्यांग बच्चों की पहचान पर भी विशेष ध्यान देने का निर्देश है। जुटाई गई जानकारी के आधार पर उनकी जरूरतों के अनुरूप शिक्षा से जोड़ने की योजना बनाई जाएगी। ऐप पर दर्ज आंकड़ों की जांच भी होगी, ताकि बच्चों से संबंधित विवरण की सत्यता सुनिश्चित की जा सके और आगे की रणनीति सटीक सूचना के आधार पर तैयार हो।

परिषद के निर्देश के अनुसार, सरकारी स्कूलों के साथ सर्वे से जोड़े गए गैर-सरकारी स्कूलों को भी इस काम में सहयोग करना होगा। तय अवधि में सर्वे पूरा नहीं करने वाले शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर वेतन रोकने की कार्रवाई की संभावना भी बताई गई है। लापरवाही या गलत सूचना दर्ज करने पर संबंधित शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई हो सकती है।

सर्वे से प्राप्त विवरण का उपयोग शिशु पंजी को अद्यतन करने और शिक्षा से वंचित बच्चों का स्पष्ट आंकड़ा तैयार करने में किया जाएगा। इसी आधार पर स्कूल छोड़ चुके या अब तक नामांकन से वंचित बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आवश्यक कदम तय किए जाएंगे।