झारखंड में प्रखंड स्तर पर खुलेंगे कस्टम हायरिंग सेंटर, किराये पर मिलेंगे कृषि यंत्र

कृषि विभाग ने प्रखंड स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर और गांवों में साझा पक्के थ्रेसिंग फ्लोर बनाने की तैयारी शुरू की है। बड़े ट्रैक्टरों की मौजूदा 50 प्रतिशत सब्सिडी बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।

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झारखंड में प्रस्तावित कस्टम हायरिंग सेंटर और कृषि यंत्रीकरण से जुड़ी प्रतीकात्मक तस्वीर

रांची में कृषि विभाग ने किसानों के लिए प्रखंड स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने की तैयारी की है। इन केंद्रों पर खेती से जुड़े विभिन्न यंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे, जिन्हें किसान अपनी जरूरत के अनुसार किराये पर ले सकेंगे। पहल का उद्देश्य किसानों को महंगे कृषि उपकरण खरीदने की मजबूरी से राहत देना और खेती में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाना है।

प्रस्तावित केंद्रों से विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। ऐसे किसान आवश्यकता के समय उपकरण लेकर कृषि कार्य कर सकेंगे, लेकिन उन्हें मशीन खरीदने का पूरा खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। विभाग ने योजनाओं को किसानों की जमीनी जरूरतों से जोड़ते हुए प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया है।

कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने गांवों में सामूहिक और सार्वजनिक उपयोग के लिए पक्के थ्रेसिंग फ्लोर बनाने का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश भी दिया है। विभाग के अनुसार, अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में धान की मिसाई, गेहूं की मड़ाई और मड़ुवा की कुटाई के लिए किसानों को समतल तथा उपयुक्त स्थान नहीं मिल पाता।

साझा थ्रेसिंग फ्लोर बनने पर गांव के किसान एक ही तैयार स्थल का उपयोग कर सकेंगे। विभाग का मानना है कि इससे कृषि उपज से जुड़े इन कामों में समय और श्रम की बचत होगी। हालांकि केंद्रों तथा थ्रेसिंग फ्लोर की संख्या, स्थान और निर्माण की समयसीमा से संबंधित विवरण अभी सामने नहीं आया है।

बैठक में विभाग की ओर से वितरित किए जाने वाले बड़े ट्रैक्टरों की सब्सिडी बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। अभी सरकार बड़े ट्रैक्टरों पर 50 प्रतिशत सहायता देती है। किसानों की जरूरतों और कृषि मशीनीकरण को ध्यान में रखते हुए इस सहायता में वृद्धि की संभावना पर विचार किया जा रहा है; बढ़ी हुई दर अभी तय नहीं हुई है।

कृषि मंत्री ने भूमि संरक्षण निदेशालय के अधिकारियों के लिए वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर जारी करने का निर्देश दिया। इसका उद्देश्य अधिकारियों को नई तकनीकों और कार्यप्रणालियों से परिचित कराना तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता और जवाबदेही बढ़ाना है। विभागीय अधिकारियों से मिले सुझावों के आधार पर सुधारात्मक पहल करने को भी कहा गया है।