झारखंड में वनों के संरक्षण और वन क्षरण पर रोक लगाने के लिए वन विभाग रेड प्लस कार्ययोजना तैयार करेगा। प्रस्तावित योजना में वनों की कार्बन अवशोषण क्षमता बढ़ाने के साथ उनके वैज्ञानिक और संधारणीय प्रबंधन के उपाय शामिल किए जाएंगे। विभाग को 15 दिनों के भीतर कार्ययोजना तैयार करने का सुझाव दिया गया है।
इस संबंध में बुधवार को रांची के डोरंडा स्थित वन भवन में उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख संजीव कुमार ने की। बैठक में वरिष्ठ वन अधिकारियों और विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने तथा राज्य के वन क्षेत्रों की क्षमता बढ़ाने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।
रेड प्लस व्यवस्था के तहत वनों की कटाई और क्षरण से होने वाले उत्सर्जन को कम करने पर ध्यान दिया जाता है। इसके साथ ही वन संरक्षण, संधारणीय प्रबंधन और वन कार्बन भंडार बढ़ाने के उपाय भी इसका हिस्सा होते हैं। झारखंड की योजना में इन्हीं विषयों को राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप शामिल करने पर जोर दिया गया।
बैठक में अधिकारियों ने कहा कि कार्ययोजना बनाते समय राज्य के अलग-अलग वन क्षेत्रों की विशेषताओं और जैव विविधता का ध्यान रखा जाना चाहिए। स्थानीय समुदायों की जरूरतों को भी योजना का हिस्सा बनाने पर चर्चा हुई, ताकि संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े प्रस्ताव क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुकूल हों।
झारखंड अपनी कार्ययोजना के लिए मिजोरम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के अनुभवों का अध्ययन करेगा। इन राज्यों में रेड प्लस के अंतर्गत योजनाएं पहले तैयार की जा चुकी हैं। वहां अपनाए गए उपायों को समझने के बाद झारखंड के लिए उपयोगी पहलुओं की पहचान की जाएगी।
बैठक में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा वन उत्पादकता संस्थान, आईआईटी आईएसएम धनबाद, केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल हुए। विभिन्न संस्थानों की विशेषज्ञता के आधार पर राज्य के लिए वैज्ञानिक, स्थानीय जरूरतों के अनुकूल और क्रियान्वयन योग्य रूपरेखा बनाने पर विचार किया गया।