झारखंड में प्रारंभिक शिक्षा से दूर 10,133 बच्चे, गिरिडीह में सर्वाधिक 1,463 की पहचान

राज्य शिक्षा परियोजना परिषद के सर्वे में तीन से पांच वर्ष आयु के 10,133 बच्चे आंगनबाड़ी, प्ले स्कूल या शिशु सदन से नहीं जुड़े मिले। जिलों को इनके नामांकन की स्थिति दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।

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आंगनबाड़ी और प्रारंभिक शिक्षा से वंचित बच्चों पर झारखंड का सर्वे

झारखंड में तीन से पांच वर्ष आयु वर्ग के 10,133 बच्चे अब भी आंगनबाड़ी केंद्र, प्ले स्कूल या सरकारी विद्यालयों से संचालित शिशु सदन से नहीं जुड़ सके हैं। राज्य शिक्षा परियोजना परिषद के सर्वे के अनुसार, इनमें 10,032 बच्चों का संबंधित संस्थानों में कभी नामांकन नहीं हुआ, जबकि 101 बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं।

जिलावार आंकड़ों में गिरिडीह की स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहां 1,463 बच्चे प्रारंभिक शिक्षा से बाहर चिह्नित किए गए हैं। इसके बाद देवघर में 1,375 और साहिबगंज में 1,066 बच्चों की पहचान हुई है। गढ़वा में 830, लातेहार में 661, पश्चिमी सिंहभूम में 636 और गोड्डा में 423 बच्चे ऐसे मिले हैं।

अन्य जिलों में पाकुड़ के 386 बच्चों में से 333 का नामांकन नहीं हुआ है और 53 बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं। धनबाद में 353 तथा बोकारो में 162 बच्चे नामांकन से वंचित पाए गए। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, धनबाद और बोकारो में चिह्नित सभी बच्चे गैर-नामांकित श्रेणी में हैं; वहां इस आयु वर्ग का कोई बच्चा ड्रॉपआउट के रूप में दर्ज नहीं है।

इन बच्चों की पहचान वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच कराए गए घर-घर सर्वे में हुई थी। डहर पोर्टल के माध्यम से हुए सर्वे में सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों ने तीन से 18 वर्ष तक के स्कूल से बाहर बच्चों की जानकारी जुटाई थी। उसी प्रक्रिया में तीन से पांच वर्ष वाले बच्चों की अलग स्थिति सामने आई।

राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन ने सभी जिलों के शिक्षा अधीक्षकों को चिह्नित बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। जिन विद्यालयों के शिक्षकों ने बच्चों की पहचान की थी, उनके प्रधानाध्यापकों को सूची निकटतम आंगनबाड़ी केंद्र, प्ले स्कूल या शिशु सदन को सौंपनी है। संबंधित संस्थानों से समन्वय कर दाखिला सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

जिलों से 15 अक्टूबर 2026 तक नामांकन की स्थिति का प्रतिवेदन मांगा गया था। नामांकन के बाद वास्तविक स्थिति निर्धारित लिंक पर दर्ज की जानी है। इस पहल का उद्देश्य कम उम्र में बच्चों को बुनियादी शिक्षा से जोड़ना और उनकी शुरुआती सीखने की क्षमता को मजबूत करना है।