झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक अवधि समाप्त होने के बाद राज्य स्तर पर बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब रहा, लेकिन जिलों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। मौसम विज्ञान केंद्र, रांची के आंकड़ों के अनुसार एक जून से 30 सितंबर के बीच पूरे राज्य में सामान्य से दो प्रतिशत कम वर्षा हुई। इसके बावजूद पाकुड़ सहित आठ जिलों को कम बारिश के कारण रेड जोन में रखा गया है।
सबसे गंभीर कमी पाकुड़ में दर्ज की गई। जिले में सामान्य 1224.5 मिलीमीटर के मुकाबले केवल 554.6 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 52 प्रतिशत कम है। कम वर्षा वाले अन्य रेड जोन जिलों में देवघर, कोडरमा, हजारीबाग, चतरा, पलामू, गढ़वा और गुमला शामिल हैं।
दूसरी ओर पश्चिमी सिंहभूम में सामान्य से 47 प्रतिशत और रांची में 18 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। सरायकेला-खरसावां में भी वर्षा की स्थिति बेहतर रही, जबकि 14 जिलों का आंकड़ा सामान्य के आसपास रहा। इससे स्पष्ट है कि राज्य का औसत सामान्य के करीब होने के बावजूद सभी जिलों को समान बारिश नहीं मिली।
महीनेवार स्थिति में भी उतार-चढ़ाव रहा। जून में सामान्य से 58 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। इसके बाद अगस्त में 26 प्रतिशत और सितंबर में 15 प्रतिशत अधिक वर्षा होने से राज्य के समग्र आंकड़े में सुधार आया। इस वर्ष मानसून 12 जून को झारखंड पहुंचा और कुल 111 दिनों तक सक्रिय रहा।
जल उपलब्धता के आंकड़े भी चिंता की एक अलग तस्वीर पेश करते हैं। केंद्रीय जल आयोग की निगरानी वाले झारखंड के छह प्रमुख जलाशयों में कुल लाइव क्षमता का 61.33 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। उनकी 2.012 बीसीएम क्षमता के मुकाबले 1.234 बीसीएम जल जमा है। यह पिछले दस वर्षों के सामान्य औसत जल स्तर से 23.59 प्रतिशत कम बताया गया है।
कृषि विभाग के अनुसार खरीफ सत्र 2026-27 में 28.53 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले करीब 23.09 लाख हेक्टेयर, यानी 80.93 प्रतिशत क्षेत्र में बुआई और रोपाई पूरी हुई। उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि राज्य का कुल वर्षा प्रतिशत अकेले स्थानीय स्थिति को नहीं दर्शाता; पाकुड़ और दूसरे रेड जोन जिलों में कम बारिश के साथ जलाशयों का स्तर और खेती का दायरा भी महत्वपूर्ण संकेतक बने हुए हैं।