झारखंड में योजना बजट का 29.38% खर्च, वित्त मंत्री ने विभागीय समीक्षा के लिए लिखा पत्र

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने योजना बजट के धीमे खर्च पर चिंता जताते हुए कम व्यय वाले विभागों की समीक्षा और निविदा प्रक्रिया तेज करने को कहा है।

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झारखंड के योजना बजट खर्च की समीक्षा से संबंधित सांकेतिक दृश्य

रांची में वित्तीय वर्ष 2026-27 के योजना बजट की धीमी खर्च दर को लेकर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विकास आयुक्त को पत्र लिखा है। पत्र में कम खर्च करने वाले विभागों के सचिवों के साथ समीक्षा बैठक करने और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पुनरीक्षित योजना बजट में निर्धारित 1,06,200.94 करोड़ रुपये में से 22 अक्टूबर तक 31,196.72 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। यह कुल राशि का 29.38 प्रतिशत है। सरकार ने दिसंबर 2026 तक योजना मद से कम से कम 75 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा है।

वित्त मंत्री के पत्र में वित्त विभाग के 10 जून 2015 के एक निर्देश का उल्लेख किया गया है, जिसके मुताबिक 30 सितंबर तक योजना राशि का कम से कम 50 प्रतिशत खर्च होना चाहिए था। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी राज्य सरकार योजना बजट का करीब 76 प्रतिशत ही खर्च कर सकी थी।

विभागवार स्थिति में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग का खर्च सबसे कम बताया गया है। विभाग ने 5,200.01 करोड़ रुपये में से 253.78 करोड़ रुपये, यानी 4.88 प्रतिशत खर्च किए। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग का व्यय 6.20 प्रतिशत और ग्रामीण विकास विभाग का 11.59 प्रतिशत दर्ज किया गया।

वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने 12.68 प्रतिशत, कल्याण विभाग ने 15.69 प्रतिशत और शहरी विकास विभाग ने 15.94 प्रतिशत राशि खर्च की। पथ निर्माण विभाग का खर्च 19.79 प्रतिशत रहा, जबकि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने अपने बजट का 24.81 प्रतिशत उपयोग किया। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में यह आंकड़ा 26.17 प्रतिशत रहा।

पत्र में निर्माण कार्यों की निविदा प्रक्रिया पूरी होने में छह महीने से डेढ़ साल तक लगने पर भी चिंता जताई गई है। वित्त मंत्री ने निर्माण विभागों में निविदा प्रक्रिया 60 दिनों के भीतर पूरी कराने पर जोर दिया है। इसके साथ ही कम खर्च के कारणों, लंबित निविदाओं और योजनाओं की प्रगति की विभागीय स्तर पर समीक्षा करने को कहा गया है।