झारखंड में सड़क सुरक्षा से जुड़ी 166.92 करोड़ रुपये की योजनाओं की प्रगति 11 महीने बाद भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। ये योजनाएं वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 10 अक्टूबर 2025 को मुख्य सचिव अविनाश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में मंजूर की गई थीं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, स्वीकृत कार्यों में से अधिकांश अब तक पूरे नहीं हुए हैं।
योजनाओं की धीमी प्रगति को लेकर परिवहन विभाग के सचिव राजीव रंजन ने परिवहन आयुक्त-सह-सदस्य सचिव संजीव कुमार बेसरा से स्पष्टीकरण मांगा था। पहला पत्र 31 जुलाई 2026 को जारी कर तीन दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया, लेकिन निर्धारित अवधि में उत्तर नहीं मिलने की बात सामने आई है।
इसके बाद परिवहन सचिव ने 10 सितंबर को दोबारा पत्र भेजा। इसमें छह बिंदुओं पर तीन कार्य दिवस के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। पत्र की प्रतिलिपि मुख्य सचिव कार्यालय और संबंधित मंत्री के आप्त सचिव को भी सूचना तथा आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
स्वीकृत योजनाओं में ब्लैक स्पॉट और संवेदनशील स्थानों पर एसवीडी, आरपीआर तथा सीसीटीवी लगाने के लिए 55 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है। पहाड़ी और दुर्घटना संभावित स्थानों पर यूनिपोल लगाने के लिए 15 करोड़ और स्वचालित परीक्षण ट्रैक के लिए 20 करोड़ रुपये रखे गए थे। वाहन वजन प्रणाली के लिए 75 लाख रुपये निर्धारित किए गए थे।
इसके अतिरिक्त जीवन रक्षक आपातकालीन सेवा योजना के लिए 7.01 करोड़, जागरूकता एवं प्रचार के लिए 2.50 करोड़ और सभी 24 जिलों में 24 इंटरसेप्टर वैन की व्यवस्था के लिए 5.76 करोड़ रुपये का प्रावधान था। अधिकारियों, स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिसकर्मियों, एंबुलेंस चालकों और कंडक्टरों के प्रशिक्षण के लिए 25 लाख रुपये निर्धारित किए गए थे।
विभागीय पत्र में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन जैसे उपायों के क्रियान्वयन में प्रगति नहीं होने पर भी चिंता जताई गई है। पत्र में कहा गया है कि सड़क सुरक्षा संबंधी इन उपायों को शीघ्र और प्रभावी तरीके से लागू करने पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों में जोर दिया गया है। अब परिवहन आयुक्त से मांगे गए जवाब के बाद योजनाओं की स्थिति और आगे की विभागीय कार्रवाई स्पष्ट होने की प्रतीक्षा है।