झारखंड में 5.50 लाख बच्चों की नामांकन स्थिति अस्पष्ट, जिलों को सत्यापन और दोबारा दाखिले का निर्देश

शिक्षा विभाग ने ड्रॉप बॉक्स में दर्ज करीब 5.50 लाख बच्चों की वास्तविक नामांकन स्थिति जांचने और पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को फिर स्कूल से जोड़ने को कहा है।

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झारखंड में बच्चों के नामांकन और स्कूल वापसी की समीक्षा का सांकेतिक दृश्य

रांची में हुई विभागीय समीक्षा बैठक के बाद झारखंड के सभी जिलों को करीब 5.50 लाख बच्चों की वास्तविक नामांकन स्थिति जांचने का निर्देश दिया गया है। विभागीय रिकॉर्ड में ये बच्चे ऑनलाइन नामांकन व्यवस्था के ड्रॉप बॉक्स में दर्ज हैं। यह स्पष्ट किया जाना है कि इनमें से कितने बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी और कितनों ने किसी दूसरी कक्षा या विद्यालय में प्रवेश लिया, लेकिन उनकी जानकारी पोर्टल पर अपडेट नहीं हुई।

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने अधिकारियों से प्रत्येक ऐसे बच्चे की पहचान करने को कहा है। जांच में जिन बच्चों का कहीं नामांकन नहीं मिलेगा, उन्हें दोबारा विद्यालय से जोड़ना होगा। विभाग का उद्देश्य स्कूल से बाहर हुए बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में वापस लाना और ऑनलाइन रिकॉर्ड को वास्तविक स्थिति के अनुरूप करना है।

बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला शिक्षा अधीक्षकों की जिम्मेदारी तय करने का निर्देश भी दिया गया। संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने को कहा गया है। जिलों से अपेक्षा की गई है कि वे केवल पोर्टल की प्रविष्टियों पर निर्भर रहने के बजाय बच्चों के दाखिले की स्थिति का सत्यापन करें और लंबित मामलों पर कार्रवाई करें।

शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति भी समीक्षा का हिस्सा रही। जिलों को शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने तथा उसकी नियमित निगरानी करने का निर्देश मिला। इसके साथ विद्यालयों में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति बढ़ाने पर ध्यान देने को कहा गया, ताकि नामांकन के साथ कक्षाओं में उनकी वास्तविक भागीदारी का भी आकलन हो सके।

मध्याह्न भोजन योजना की समीक्षा में सामने आया कि कक्षा एक से आठ तक नामांकित बच्चों की तुलना में औसतन 55 से 60 प्रतिशत विद्यार्थी ही भोजन ले रहे हैं। विभाग ने जिलों से इस अंतर के कारणों की पड़ताल करने, लाभार्थी बच्चों की संख्या बढ़ाने और योजना के संचालन की लगातार निगरानी करने को कहा है।

बैठक में पात्र शिक्षकों को वरीय वेतनमान देने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का निर्देश भी दिया गया। अधिकारियों से कहा गया कि इस मामले में अनावश्यक देरी न हो। समीक्षा में नामांकन, उपस्थिति, मध्याह्न भोजन और शिक्षकों से जुड़े विषयों को एक साथ रखते हुए जिलों को अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है।