रांची में झारखंड स्वास्थ्य विभाग लंबे समय से अनुपस्थित रहने या नियुक्ति के बाद कार्यस्थल पर योगदान नहीं देने के आरोप में 631 डॉक्टरों को सेवामुक्त करने की तैयारी कर रहा है। इस बीच सूची में शामिल कई चिकित्सकों ने विभागीय रिकॉर्ड की शुद्धता पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि वे अनापत्ति प्रमाणपत्र, अध्ययन अवकाश या अन्य अनुमति लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
प्रभावित डॉक्टरों का कहना है कि सेवा समाप्त करने का अंतिम निर्णय लेने से पहले नियुक्ति, योगदान, इस्तीफा, अध्ययन अवकाश, एनओसी और वर्तमान कार्यस्थल से जुड़े दस्तावेजों का मिलान होना चाहिए। कुछ चिकित्सकों ने यह भी दावा किया है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वे निर्धारित संस्थानों में योगदान दे चुके हैं, फिर भी उनका नाम अनुपस्थित डॉक्टरों की सूची में है।
सूची में शामिल चिकित्सकों के अलग-अलग मामले सामने आए हैं। डॉ. पूजा झा के अनुसार, उन्होंने 2020 में ही इस्तीफा दे दिया था और अभी दिल्ली में डीएनबी एनेस्थीसिया की पढ़ाई कर रही हैं। डॉ. किसलय अंकिता टुडू ने बताया कि वे रिम्स के ईएनटी विभाग में जूनियर रेजिडेंट हैं। डॉ. अनुपम डुंगडुंग का दावा है कि अध्ययन अवकाश के बाद उन्होंने 23 अक्टूबर 2026 को गिरिडीह सदर अस्पताल में योगदान कर दिया था।
डॉ. अनिकेत कुमार ने विभागीय अनुमति के साथ एमएस आर्थोपेडिक्स की पढ़ाई करने की बात कही है। वहीं, डॉ. जयदीप चौधरी के बारे में बताया गया है कि उन्होंने जमुआ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सेवा देने के बाद रिम्स से पीजी किया और फिर वहीं सीनियर रेजिडेंसी के लिए आए। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख उपलब्ध विवरण में नहीं है।
विभागीय जानकारी के अनुसार, सूची में 1990 से 2023 के बीच नियुक्त डॉक्टर शामिल हैं। इनमें 2009 में नियुक्त 308, वर्ष 2015 के 124, वर्ष 2012 के 65, वर्ष 2013 के 38, वर्ष 2020 के 37 और वर्ष 2021 के 17 चिकित्सक बताए गए हैं। विभाग इससे पहले 2025 में योगदान नहीं देने वाले 86 मेडिकल ऑफिसर और 57 विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवा समाप्त कर चुका है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के अनुसार, संबंधित डॉक्टरों को अपना पक्ष रखने का अवसर पहले दिया जा चुका है। अब सामने नहीं आने वाले चिकित्सकों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी, ताकि नई नियुक्तियों का रास्ता बनाया जा सके। एनओसी या वैध अवकाश का दावा करने वाले डॉक्टरों ने बिना अनुमति अनुपस्थित कर्मियों पर कार्रवाई का समर्थन करते हुए अपने मामलों की अलग-अलग जांच की मांग की है।