झारखंड विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र 25 और 26 नवंबर को आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में विशेष सत्र बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस दौरान केंद्र सरकार के माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) संशोधन अधिनियम, 2026 और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर पर चर्चा प्रस्तावित है।
कैबिनेट की प्रधान सचिव वंदना दादेल के अनुसार, मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 62 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। विधानसभा में एमएमडीआर संशोधन और एसआईआर पर विचार के बाद दोनों विषयों से संबंधित प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजे जाने की संभावना है। अंतिम निर्णय विशेष सत्र में होने वाली चर्चा और सदन की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
उच्च शिक्षा से जुड़े निर्णयों के तहत राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में हेल्थ केयर यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है। इन संस्थानों में विद्यार्थियों की हेल्थ आईडी बनाई जाएगी और उनकी स्वास्थ्य रिपोर्ट का रिकॉर्ड रखा जाएगा। विश्वविद्यालय इस व्यवस्था पर अपने बजट की दो प्रतिशत राशि खर्च कर सकेंगे। राजकीय और महिला पॉलिटेक्निक के विद्यार्थियों को इंटर्नशिप प्रशिक्षण देने की भी स्वीकृति मिली है।
स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार के लिए झारखंड में मेडिको सिटी समूह गठित करने की योजना को मंजूरी दी गई। अस्पतालों के इस समूह में पांच हजार बेड तैयार करने और बाद में क्षमता छह हजार बेड तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। परियोजना के भवन, सड़क और ड्रेनेज समेत अन्य कार्यों के लिए 284.17 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। जमशेदपुर स्थित एमजीएम अस्पताल में पांच सौ बेड के भवन निर्माण के लिए 545.38 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं।
कैबिनेट ने झारखंड दुकान एवं प्रतिष्ठान विधेयक में संशोधन तथा नई खनिज नीति से जुड़े प्रस्तावों पर भी मुहर लगाई। संशोधन में काम की दैनिक अवधि नौ से बढ़ाकर दस घंटे करने का प्रावधान है, जबकि दस घंटे से अधिक काम पर अतिरिक्त भुगतान करना होगा। साप्ताहिक कार्य अवधि 48 घंटे और तीन महीने में 144 घंटे से अधिक नहीं रखने का प्रावधान बताया गया है।
खनन क्षेत्र में झारखंड मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड ब्लॉक डेवलपमेंट पॉलिसी, 2026 के गठन को स्वीकृति दी गई। इसके तहत खनिज ब्लॉकों को आंशिक और पूर्ण रूप से अन्वेषित श्रेणियों में बांटा जाएगा। भूवैज्ञानिक स्थिति, वित्तीय जरूरत, जोखिम और व्यावसायिक उत्पादन के आधार पर उनके संचालन का मॉडल तय किया जाएगा। धातुकर्मीय ग्रेड बॉक्साइट पर उपकर की दर भी दो प्रतिशत से बढ़ाकर चार प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है।