हजारीबाग में लोक लेखा समिति की बैठक, सरकारी खर्च और लंबित ऑडिट आपत्तियों की समीक्षा

झारखंड विधानसभा की लोक लेखा समिति ने हजारीबाग में विभागवार खर्च, लंबित ऑडिट आपत्तियों, उपयोगिता प्रमाणपत्र और योजनाओं के क्रियान्वयन पर अधिकारियों से जानकारी ली।

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हजारीबाग जिला परिसदन में लोक लेखा समिति की बैठक का दृश्य

हजारीबाग के जिला परिसदन सभागार में बुधवार को झारखंड विधानसभा की लोक लेखा समिति की बैठक हुई। इसमें जिले के विभिन्न विभागों के सरकारी खर्च, वित्तीय रिकॉर्ड और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। समिति ने संबंधित अधिकारियों से विभागवार जानकारी और लंबित मामलों का विवरण मांगा।

बैठक में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में उठाए गए बिंदुओं तथा लंबे समय से लंबित ऑडिट आपत्तियों पर चर्चा की गई। समिति ने सार्वजनिक धन के इस्तेमाल और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े मामलों की स्थिति समझने के लिए अधिकारियों से उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर जवाब लिया।

समीक्षा के दायरे में जिला परिषद, पथ एवं भवन निर्माण, ग्रामीण विकास, विशेष प्रमंडल, स्वास्थ्य, शिक्षा, आपूर्ति, पंचायती राज और मनरेगा सहित कई विभाग रहे। पंद्रहवें वित्त आयोग से संबंधित कार्यों पर भी जानकारी ली गई। बैठक में इन विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी और कार्यपालक अभियंता उपस्थित थे।

समिति ने विभिन्न विभागों में लंबित अग्रिम राशि, भुगतान से जुड़ी आपत्तियों, निविदा प्रक्रिया और पांच प्रतिशत सिक्योरिटी डिपॉजिट के मामलों की जानकारी तलब की। योजनाओं पर राशि खर्च होने के बाद उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा नहीं किए जाने वाले प्रकरण भी समीक्षा में शामिल रहे।

बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने योजनाओं की प्रगति और उन पर हुए खर्च का ब्योरा लिया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, संबंधित मामलों में जानकारी जुटाने के साथ अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य ऑडिट में सामने आए प्रश्नों पर विभागों की स्थिति स्पष्ट करना है।

लोक लेखा समिति सरकारी राशि के उपयोग और ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियों की विधायी समीक्षा करती है। हजारीबाग में हुई विभागवार पड़ताल के आधार पर समिति आगे अपनी रिपोर्ट झारखंड विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत करेगी।