धनबाद नगर निगम का निर्माण हटाने और दो लाख जुर्माने का आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द

झारखंड हाईकोर्ट ने सुगियाडीह मेन रोड से जुड़े कथित अवैध निर्माण मामले में धनबाद नगर निगम का आदेश रद्द कर दिया। निगम को संबंधित पक्ष को सुनकर नए सिरे से फैसला लेने को कहा गया है।

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झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद नगर निगम के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें एक कथित अवैध निर्माण हटाने और दो लाख रुपये का जुर्माना लगाने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने निगम को संबंधित पक्ष को अपनी बात रखने का अवसर देते हुए मामले की दोबारा सुनवाई करने और नया निर्णय लेने को कहा है।

मामला धनबाद की आठ लेन सड़क के सुगियाडीह मेन रोड क्षेत्र के पास स्थित जमीन से जुड़ा है। नगर आयुक्त ने 22 जुलाई को आदेश जारी कर वहां बताए गए निर्माण को हटाने के साथ जुर्माना लगाने का निर्देश दिया था। इस कार्रवाई को सच्चिदानंद राय ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि जिस भूखंड पर कथित अवैध निर्माण हुआ है, उसके मालिक वह नहीं हैं। उनका पक्ष था कि उनकी जमीन उस स्थान के पास है, जबकि विवादित जमीन उनकी रिश्तेदार उर्मिला देवी की है। इसी आधार पर उन्होंने निर्माण से अपना संबंध होने से इनकार किया।

अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता ने धनबाद नगर निगम से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था। इसके बावजूद, उनके अनुसार, उनका जवाब लिए और पक्ष सुने बिना निगम ने अंतिम आदेश जारी कर दिया।

हाईकोर्ट ने माना कि निर्माण हटाने तथा आर्थिक दंड लगाने जैसा आदेश देने से पहले संबंधित पक्ष को जवाब देने और अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिलना चाहिए। अदालत ने इसी प्रक्रिया का पालन नहीं होने के आधार पर निगम का पूर्व आदेश निरस्त कर दिया।

अब धनबाद नगर निगम को मामले पर नए सिरे से सुनवाई करनी होगी। अदालत के निर्देश के बाद निगम संबंधित पक्ष की दलीलों और उपलब्ध तथ्यों पर विचार कर नया फैसला ले सकेगा। फिलहाल हाईकोर्ट ने निर्माण की वैधता पर अंतिम निष्कर्ष देने के बजाय निर्णय लेने की प्रक्रिया दोबारा पूरी करने का निर्देश दिया है।