रांची में जल स्रोतों के संरक्षण से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और न्याय मित्र से अब तक की कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा मांगा है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की अदालत ने अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को निर्धारित की है। उस दिन दाखिल रिपोर्ट के साथ जल स्रोतों के संरक्षण और अतिक्रमण हटाने की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
इससे पहले राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि धुर्वा डैम, कांके डैम और गेतलसूद डैम के लिए अधिग्रहित जमीन पर अतिक्रमण से संबंधित रिपोर्ट रांची के उपायुक्त ने दाखिल कर दी है। हाईकोर्ट ने उपायुक्त से तीनों परियोजनाओं की अधिग्रहित भूमि का पूरा विवरण शपथपत्र के माध्यम से देने को कहा था।
अदालत ने जमीन का सटीक रकबा, नक्शा, संबंधित सर्वे नंबर और अतिक्रमण का विवरण मांगा है। इसके अलावा अतिक्रमण हटाने के लिए अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी भी प्रस्तुत करनी है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने धुर्वा डैम परियोजना की भूमि से जुड़े मामले की जांच की सीलबंद रिपोर्ट अदालत में दी थी। ब्यूरो के मुताबिक, सात जनवरी के आदेश के बाद नगड़ी थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई और जांच जारी है।
सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता झारखंड सिविल सोसाइटी के अधिवक्ता शुभम कटारूका ने रांची जिला स्कूल में पुरानी पानी टंकी हटाकर नई टंकी बनाने के दौरान दो मजदूरों की मौत का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने घटना के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और संबंधित ठेकेदार की लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
इसी पीठ ने ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निर्मित पुल-पुलियों के गिरने से संबंधित एक अन्य जनहित याचिका पर भी सुनवाई की। सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया और याचिकाकर्ता तथा राज्य सरकार को पांच अक्टूबर तक अपना लिखित पक्ष देने का निर्देश दिया।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पुल-पुलियों के गिरने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जरूरी कदम उठाए गए हैं, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है और संबंधित ठेकेदार को काली सूची में डाला गया है। याचिकाकर्ता पंकज कुमार यादव ने निर्माण कार्यों में अनियमितता और लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामलों की ईडी तथा सीबीआई से जांच कराने का आग्रह किया है।