झारखंड हाई कोर्ट ने ट्रक चालक की मौत का मुआवजा बढ़ाकर 18.30 लाख रुपये किया

हाई कोर्ट ने पाकुड़ दावा न्यायाधिकरण के 5.76 लाख रुपये के आकलन को संशोधित करते हुए बीमा कंपनी को छह सप्ताह में ब्याज समेत भुगतान का निर्देश दिया।

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रांची स्थित झारखंड हाई कोर्ट भवन का दृश्य

रांची में झारखंड हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले भारी वाहन चालक जहांगीर खान के आश्रितों को मिलने वाला मुआवजा 5.76 लाख रुपये से बढ़ाकर 18.30 लाख रुपये कर दिया है। बढ़ी हुई राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक ने 28 अगस्त को एमए संख्या 21/2014 का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया।

मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल, पाकुड़ ने वर्ष 2012 में मुआवजा निर्धारित करते समय चालक की मासिक आय 4,500 रुपये मानी थी। हाई कोर्ट ने इस आकलन को उचित नहीं माना और मासिक आय 10 हजार रुपये निर्धारित की। इसके साथ भविष्य की आय की संभावना के मद में 40 प्रतिशत जोड़ते हुए मुआवजे की दोबारा गणना की गई।

आदेश में अदालत ने भारी व्यावसायिक वाहन चलाने को कुशल कार्य माना। इसी आधार पर कहा गया कि ऐसे चालक को कम या अर्धकुशल श्रमिक की श्रेणी में रखकर उसकी आय घटाना उचित नहीं है। पुनर्गणना के बाद परिवार को देय कुल रकम पहले तय राशि की तुलना में करीब 3.18 गुना हो गई।

नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को मुआवजे और निर्धारित ब्याज की पूरी रकम छह सप्ताह के भीतर दावेदारों के बैंक खातों में जमा करने का निर्देश मिला है। यह अपील 2014 में हाई कोर्ट पहुंची थी और लगभग 12 वर्ष चली कानूनी प्रक्रिया के बाद इसका अंतिम निपटारा हुआ।

अदालत ने झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार और जिला विधिक सेवा प्राधिकार, साहिबगंज को परिवार से सीधे समन्वय करने को भी कहा है। इन संस्थाओं को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि दावेदारों को राशि प्राप्त करने में परेशानी या शोषण का सामना न करना पड़े और रकम सुरक्षित रूप से उनके खातों तक पहुंचे।

मामले में न्यायमित्र के रूप में अदालत की सहायता करने वाले अधिवक्ता अनिकेत कुमार ओझा के काम की भी आदेश में सराहना की गई। अदालत ने ग्रामीण और साधनहीन दावेदारों का पक्ष प्रभावी ढंग से रखने में उनके सहयोग को दर्ज किया तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकार को उनकी कानूनी फीस के भुगतान का निर्देश दिया।