डांगोवापोसी-जुरूली तीसरी-चौथी रेल लाइन पर ग्रामसभा फिर स्थगित, 28 अक्टूबर को अगली बैठक

महुदी स्टेशन बस्ती में रैयतों और स्थानीय प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारण ग्रामसभा नहीं हो सकी। रेलवे की चार सदस्यीय टीम करीब दो घंटे इंतजार के बाद लौट गई।

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नोवामुंडी में प्रस्तावित रेल लाइन विस्तार के लिए ग्रामसभा स्थल पर पहुंचे अधिकारी

पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी क्षेत्र में डांगोवापोसी से जुरूली स्टेशन तक प्रस्तावित तीसरी और चौथी रेल लाइन के लिए रैयतों की सहमति लेने की प्रक्रिया एक बार फिर आगे नहीं बढ़ सकी। महुदी स्टेशन बस्ती में बुलाई गई ग्रामसभा संबंधित रैयतों की अनुपस्थिति के कारण स्थगित कर दी गई।

रेलवे के टाटानगर इंजीनियरिंग विभाग की चार सदस्यीय टीम शुक्रवार सुबह 11 बजे निर्धारित स्थल पर पहुंची थी। अधिकारी दोपहर एक बजे तक रैयतों के आने का इंतजार करते रहे। किसी के नहीं पहुंचने के बाद टीम बिना बैठक किए जमशेदपुर लौट गई।

नोवामुंडी अंचल कार्यालय के अंचल निरीक्षक पंकज कुमार चंद्रा और राजस्व कर्मचारी शेखर हेंब्रम भी ग्रामसभा के लिए पहुंचे थे। अंचल निरीक्षक ने बैठक स्थगित किए जाने की घोषणा की। महुदी गांव के ग्रामीण मुंडा अजय लागुरी की अध्यक्षता में यह ग्रामसभा होनी थी, लेकिन क्षेत्रीय मानकी और पंचायत मुखिया भी उपस्थित नहीं हुए।

प्रस्तावित रेल परियोजना डांगोवापोसी रेलवे उपखंड से जुरूली स्टेशन तक करीब 42 किलोमीटर लंबी है। ग्रामसभा का उद्देश्य चिह्नित जमीन के मालिकों की सहमति लेना और मुआवजे सहित अन्य मुद्दों पर बातचीत करना था। अंचल कार्यालय को महुदी पंचायत के प्लॉट संख्या 4973 और 4971 से संबंधित जमीन पर अतिक्रमण के दायरे में आने वाले दो रैयतों के नाम मिले हैं।

अधिकारियों के अनुसार सर्वेक्षण में चिह्नित स्थानों पर ही तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने का प्रस्ताव है। परियोजना पूरी होने पर क्षेत्र में रेल परिचालन और सुविधाओं के विस्तार में सहूलियत मिलने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि जमीन से जुड़े पक्षों की भागीदारी नहीं होने से सहमति और मुआवजे की चर्चा फिलहाल लंबित रह गई है।

इससे पहले पदापहाड़ गांव के मुंगड़ूसाई और महुदी स्टेशन बस्ती में भी ग्रामसभाएं स्थगित हो चुकी हैं। अब अगली ग्रामसभा 28 अक्टूबर को महुदी पंचायत के शालीकुटी गांव में निर्धारित की गई है। सारबिल गांव में प्रस्तावित ग्रामसभा को लेकर भी असमंजस बना हुआ है और अंचल कार्यालय तथा रेलवे इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी स्थिति पर नजर रख रहे हैं।