झारखंड में पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति से जुड़े मामले में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अनुपालन हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष रखा है। सरकार ने इसमें वर्ष 2024 से तदाशा मिश्रा को डीजीपी बनाए जाने तक की परिस्थितियों और चयन प्रक्रिया का क्रमवार विवरण दिया है। हलफनामे के अनुसार, नियुक्ति मनमाने ढंग से नहीं बल्कि राज्य में लागू नियमों के तहत की गई।
सरकार ने बताया कि वर्ष 2024 में तत्कालीन डीजीपी अजय कुमार सिंह ने पद पर बने रहने में असमर्थता या अनिच्छा जताई थी। इसके बाद कानून-व्यवस्था और सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए सीआईडी के तत्कालीन डीजी अनुराग गुप्ता को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। नियमित नियुक्ति के लिए यूपीएससी से नया पैनल तैयार करने का प्रस्ताव भी भेजा गया था।
हलफनामे के मुताबिक, विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने पर आचार संहिता और चुनाव आयोग के निर्देशों के कारण डीजीपी पद पर फिर बदलाव किया गया। अनुराग गुप्ता को प्रभार से हटाकर अजय कुमार सिंह को चुनाव अवधि तक जिम्मेदारी दी गई। चुनाव समाप्त होने के बाद 28 नवंबर 2024 को अनुराग गुप्ता को दोबारा अतिरिक्त प्रभार मिला।
राज्य सरकार का कहना है कि सितंबर से दिसंबर 2024 के बीच यूपीएससी से लगातार पत्राचार किया गया, लेकिन नियमित डीजीपी नियुक्ति के लिए पैनल उपलब्ध नहीं हुआ। इसके बाद डीजीपी और पुलिस महानिरीक्षक के चयन एवं नियुक्ति से जुड़े नए नियम तैयार किए गए, जिन्हें जनवरी 2025 में राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली। नियमों के अंतर्गत छह सदस्यीय चयन एवं नामांकन समिति गठित की गई।
सरकार के अनुसार, समिति ने 21 जनवरी 2025 को बैठक कर डीजी रैंक के तीन अधिकारियों का पैनल तैयार किया। वरिष्ठता को ध्यान में रखते हुए इसी पैनल से अनुराग गुप्ता को नियमित डीजीपी नियुक्त किया गया। बाद में उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का आवेदन दिया और 6 नवंबर 2025 से उनकी सेवा समाप्त हो गई। इसके बाद तदाशा मिश्रा को कार्यवाहक प्रभार मिला तथा 12 नवंबर को उन्हें डीजी रैंक में प्रोन्नति दी गई।
हलफनामे में वरिष्ठ अधिकारियों की उपलब्धता का मुद्दा भी रखा गया है। सरकार के अनुसार, संबंधित समय में झारखंड कैडर में डीजी रैंक के केवल चार और एडीजी रैंक के आठ अधिकारी थे, जिनमें पांच केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे। राज्य ने अदालत को बताया कि सीमित विकल्पों की इसी परिस्थिति को देखते हुए चयन नियमों में बदलाव किया गया और अनुभवी अधिकारियों को भी चयन के दायरे में लाया गया।