लातेहार जिले के बेतला नेशनल पार्क को गुरुवार को पर्यटकों के लिए फिर खोल दिया गया। चतरा सांसद कालीचरण सिंह और पलामू टाइगर रिजर्व के अधिकारियों की मौजूदगी में नए पर्यटन सत्र की शुरुआत हुई। पार्क के द्वार खुलने के साथ ही पर्यटकों के लिए खुले वाहनों से जंगल सफारी भी शुरू कर दी गई।
पलामू टाइगर रिजर्व के इस पर्यटन क्षेत्र में एक जुलाई से 30 सितंबर तक पर्यटकीय गतिविधियां बंद रखी गई थीं। यह अवधि वन्यजीवों का प्रजनन काल मानी जाती है। तीन महीने के अंतराल के बाद पार्क खुलने पर पहले दिन पर्यटक सफारी वाहनों से जंगल और प्राकृतिक परिवेश देखने पहुंचे।
नए सत्र में पर्यटकों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के लिए निगरानी तथा गश्त बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, सफारी वाहन चालकों और गाइड के लिए वर्दी अनिवार्य होगी। जंगल के भीतर वाहन से उतरने या वन्यजीवों को परेशान करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पार्क क्षेत्र में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर भी रोक रहेगी।
इस बार पलामू किले वाले क्षेत्र में भी ओपन सफारी शुरू की जा रही है। इस हिस्से में मोटरसाइकिलों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। पार्क प्रशासन ने पर्यटकों के आगमन को देखते हुए सफारी और दूसरी आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार की हैं। बेतला नेशनल पार्क मेदिनीनगर से करीब 25 किलोमीटर और बरवाडीह रेलवे स्टेशन से लगभग 12 किलोमीटर दूर है।
पर्यटन को स्थानीय खान-पान और उत्पादों से जोड़ने की तैयारी भी की गई है। पर्यटकों के लिए धुस्का और महुआ से बने व्यंजन उपलब्ध कराने की बात कही गई है। पार्क परिसर में स्थानीय उत्पाद तथा स्मृति चिह्न रखने और पलामू किला नाका के पास देशी भोजन की व्यवस्था करने की योजना भी सामने आई है।
इन पहलों का उद्देश्य पर्यटकों को जंगल व ऐतिहासिक स्थलों के साथ स्थानीय संस्कृति का अनुभव देना है। साथ ही स्थानीय उत्पादों को बाजार और आसपास के ग्रामीण परिवारों को पर्यटन आधारित रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया गया है। दुर्गा पूजा के बाद बेतला में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद के बीच पार्क प्रबंधन ने नियमों का पालन करने को महत्वपूर्ण बताया है।