नीमडीह-कुकड़ू के खेतों तक पहुंचेगा चांडिल डैम का पानी, 607.03 करोड़ की योजना मंजूर

झारखंड कैबिनेट ने सरायकेला-खरसावां के नीमडीह और कुकड़ू प्रखंडों के लिए मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना को प्रशासनिक स्वीकृति दी है। भूमिगत पाइपलाइन से खेतों तक पानी पहुंचाने का प्रस्ताव है।

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सरायकेला-खरसावां में चांडिल डैम से सिंचाई की प्रस्तावित मेगा लिफ्ट योजना

सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह और कुकड़ू प्रखंडों में सिंचाई सुविधा बढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार ने नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना को मंजूरी दी है। मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में योजना के क्रियान्वयन के लिए 607.0332 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई। इसके तहत चांडिल जलाशय के पानी को दोनों प्रखंडों के खेतों तक पहुंचाने का प्रस्ताव है।

प्रस्तावित व्यवस्था में जलाशय से पानी लिफ्ट कर भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से कृषि क्षेत्रों तक ले जाया जाएगा। इसका उद्देश्य उन खेतों में सिंचाई की उपलब्धता बढ़ाना है जहां खेती काफी हद तक वर्षा पर निर्भर है। योजना लागू होने के बाद किसानों को धान के अतिरिक्त रबी और दूसरी मौसमी फसलों की खेती के लिए भी पानी मिलने की संभावना है।

ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में जल संसाधन मौजूद होने के बावजूद खेतों तक नियमित पानी पहुंचाना लंबे समय से चुनौती रहा है। नीमडीह और कुकड़ू के किसानों की ओर से समुचित सिंचाई व्यवस्था की मांग भी उठती रही है। नई स्वीकृति को इसी समस्या के समाधान की दिशा में एक प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।

नियमित सिंचाई उपलब्ध होने पर किसानों के लिए फसल चुनने के विकल्प बढ़ सकते हैं और अलग-अलग मौसम में खेती करना संभव हो सकता है। इससे कृषि उत्पादन और आय में सुधार की उम्मीद जताई गई है। हालांकि खेतों को वास्तविक लाभ मिलने का दायरा निर्माण कार्य, भूमिगत पाइपलाइन के विस्तार तथा नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित किए जाने पर निर्भर करेगा।

योजना की स्वीकृति पर विधायक सविता महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार जताते हुए इसे क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। सरायकेला-खरसावां जिला परिषद की उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने भी राज्य सरकार और जिला प्रशासन के फैसले का स्वागत किया।

जिला परिषद उपाध्यक्ष के अनुसार, उन्होंने चांडिल जलाशय से नीमडीह और कुकड़ू के किसानों को सिंचाई सुविधा देने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को तीन बार मांग पत्र सौंपा था। प्रशासनिक स्वीकृति के बाद अब स्थानीय किसानों की निगाह योजना के निर्माण, पाइपलाइन बिछाने और खेतों तक जलापूर्ति शुरू होने की आगे की प्रक्रिया पर रहेगी।