दीपावली के लिए गढ़वा में करीब 70 लाख मिट्टी के दीये तैयार कर रहे कुम्हार

गढ़वा जिले के कुम्हार परिवार दीपावली की बढ़ती मांग के बीच करीब 70 लाख मिट्टी के दीये बनाने में जुटे हैं। तेनार गांव से बड़ी संख्या में दीये शहर के बाजार पहुंचाए जाएंगे।

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गढ़वा में दीपावली के लिए चाक पर मिट्टी के दीये तैयार करता कुम्हार

गढ़वा जिले में दीपावली की तैयारियों के बीच कुम्हार परिवारों ने मिट्टी के दीये बनाने का काम तेज कर दिया है। प्रजापति संघ के जिलाध्यक्ष योगेंद्र प्रजापति के अनुसार, इस वर्ष जिले भर में करीब 70 लाख दीये तैयार किए जा रहे हैं। त्योहार नजदीक आने के साथ चाक लगातार चल रहे हैं और परिवार के सदस्य निर्माण के अलग-अलग चरणों में जुटे हैं।

दीयों को आकार देने के बाद उन्हें सुखाने, पकाने और बिक्री के लिए बाजार तक पहुंचाने की तैयारी भी साथ-साथ चल रही है। मांग पूरी करने के लिए कुम्हार परिवार दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। मिट्टी से तैयार होने वाले ये पारंपरिक उत्पाद दीपावली की स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक तैयारियों का अहम हिस्सा हैं।

जिले में दीयों की सबसे अधिक खरीद-बिक्री गढ़वा शहर में होती है। शहर से सटे तेनार गांव के कुम्हार बड़ी संख्या में दीये बनाकर गढ़वा बाजार लाते हैं। ऐसे में गांव के परिवारों के लिए दीपावली का समय उत्पादन के साथ ही सामान को सुरक्षित ढंग से बाजार पहुंचाने की व्यस्तता भी लेकर आया है।

मिट्टी के दीयों की मांग केवल दीपावली तक सीमित नहीं रहती। इसके बाद होने वाले छठ महापर्व में भी मिट्टी के बर्तनों का व्यापक इस्तेमाल किया जाता है। इस कारण दीपावली से छठ तक का समय कुम्हार परिवारों के कामकाज के लिहाज से विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहता है।

त्योहारी मांग बढ़ने के बावजूद कुम्हारों को बाजार में पर्याप्त जगह और जरूरी सुविधाएं नहीं मिलने की समस्या बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अधिक मेहनत और लंबे समय तक काम करने के बाद भी उनकी आमदनी तथा कारोबार को बेहतर बनाने वाली सुविधाओं का अभाव है।

करीब 70 लाख दीये तैयार करने का अनुमान बताता है कि गढ़वा में पारंपरिक मिट्टी उत्पादों की मांग अब भी मजबूत है। निर्माण से लेकर बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया कुम्हार परिवारों की मेहनत पर निर्भर है। आने वाले दिनों में तैयार दीयों और दूसरे मिट्टी के बर्तनों की खेप गढ़वा के बाजारों में पहुंचने की उम्मीद है।