दुमका के पुराने समाहरणालय सभागार को आधुनिक पुस्तकालय के रूप में विकसित किया गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 29 अक्टूबर को इसका ऑनलाइन लोकार्पण करेंगे। झारखंड आईएएस ऑफिसर्स वाइव्स एसोसिएशन और जिला प्रशासन की संयुक्त पहल से तैयार यह केंद्र विद्यार्थियों तथा युवाओं को पारंपरिक अध्ययन के साथ डिजिटल माध्यम से सीखने की सुविधा देगा।
पुस्तकालय में साहित्य, विज्ञान, दर्शन और इतिहास समेत अलग-अलग विषयों की किताबें रखी गई हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए उपयोगी पुस्तकें, पत्रिकाएं और दूसरी अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। यहां एक समय में 100 से अधिक पाठकों के बैठने की व्यवस्था की गई है।
पाठकों की सुविधा के लिए निःशुल्क वाई-फाई, पेयजल, आधुनिक फर्नीचर, बीन बैग और वॉल ग्राफिक्स की व्यवस्था की गई है। परिसर को कैफे जैसी अध्ययन शैली में तैयार किया गया है, ताकि विद्यार्थी सुविधाजनक वातावरण में पढ़ाई कर सकें। इसका उपयोग बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और अन्य पाठकों द्वारा भी किया जा सकेगा।
इस केंद्र की प्रमुख सुविधाओं में डिजिटल लर्निंग लैब शामिल है। एलईडी स्क्रीन के माध्यम से विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की ऑनलाइन कोचिंग कक्षाओं से जुड़ सकेंगे। इसके लिए प्रमुख ऑनलाइन कोचिंग संस्थानों के पाठ्यक्रमों की सदस्यता ली गई है। इससे एक ही स्थान पर डिजिटल अध्ययन सामग्री और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की तैयारी है।
पुस्तकालय में कंप्यूटर, लैपटॉप और अन्य डिजिटल संसाधन भी लगाए गए हैं। इनके जरिए विद्यार्थियों को ऑनलाइन शिक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित अध्ययन से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही वे कोडिंग तथा जनोपयोगी एप्लीकेशन विकसित करने की संभावनाओं से परिचित हो सकेंगे।
इस परियोजना के तहत अनुपयोगी पड़े सरकारी भवन को सार्वजनिक शैक्षणिक संसाधन में बदला गया है। पुस्तकालय का उद्देश्य दुमका के युवाओं के लिए अध्ययन सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी आसान बनाने और आधुनिक तकनीकी कौशल तक पहुंच विकसित करना है। इसकी दीर्घकालीन उपयोगिता नियमित और प्रभावी संचालन पर निर्भर करेगी।