रांची में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद और आईपीई ग्लोबल लिमिटेड के बीच एक समझौता ज्ञापन हुआ है। इसके तहत राज्य के सरकारी स्कूलों में नौवीं से 12वीं कक्षा तक चल रही व्यावसायिक शिक्षा को रोजगार और करियर के अवसरों से जोड़ने पर काम किया जाएगा। यह समझौता आईपीई ग्लोबल के ‘शी लर्न्स’ प्रोजेक्ट के अंतर्गत किया गया है।
नई साझेदारी में विद्यार्थियों को अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्ध करियर विकल्पों की जानकारी देने के साथ कार्यस्थलों का अनुभव कराने की योजना है। उन्हें काम करते हुए प्रशिक्षण के अवसरों से भी जोड़ा जाएगा, ताकि कक्षा में मिली शिक्षा का व्यावहारिक उपयोग समझ सकें।
समझौते के बाद राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन ने कक्षा की पढ़ाई को कार्यस्थल के अनुभव से जोड़ने पर जोर दिया। कार्यक्रम में झारखंड के उद्योगों को शामिल करने की तैयारी है। इससे विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक अनुभव, प्रशिक्षण और करियर से जुड़े वास्तविक अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास होगा।
आईपीई ग्लोबल उद्योगों और नियोक्ताओं के साथ भागीदारी बनाने में शिक्षा परियोजना परिषद की सहायता करेगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई, कौशल प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और नौकरियों से जुड़ने के रास्तों की जानकारी देना है। व्यावसायिक प्रशिक्षकों की क्षमता बढ़ाने और विद्यार्थियों में रोजगार के लिए जरूरी कौशल विकसित करने पर भी काम किया जाएगा।
फिलहाल झारखंड के सभी 24 जिलों के 970 सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित हो रही है। नौवीं से 12वीं कक्षा के 2.40 लाख से अधिक विद्यार्थी इसमें नामांकित हैं और इनमें करीब 60 प्रतिशत छात्राएं हैं। विद्यार्थियों को 15 अलग-अलग क्षेत्रों से संबंधित ट्रेड की पढ़ाई कराई जा रही है।
इस पहल के माध्यम से स्कूल स्तर पर पढ़ाई और कौशल के बीच संबंध मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा। विद्यार्थियों को अपनी रुचि के अनुसार करियर चुनने और उपलब्ध प्रशिक्षण विकल्पों को समझने में मदद देने की योजना है। कार्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप बताया गया है।