दुमका जिले में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी सदस्यों के आधार ई-केवाईसी की प्रगति अब भी धीमी है। LOKOS पोर्टल के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जिले में 38.04 प्रतिशत सदस्यों की प्रक्रिया पूरी हुई है। शेष पात्र सदस्यों का सत्यापन जल्द कराने के लिए कम उपलब्धि वाले प्रखंडों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी की ओर से अभियान की समीक्षा के बाद जिला और प्रखंड स्तर की टीमों को काम में तेजी लाने का निर्देश मिला है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक निशांत एक्का ने लंबित ई-केवाईसी मामलों को चिह्नित कर उनका शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने को कहा है।
प्रखंडवार स्थिति में काठीकुंड सबसे पीछे है, जहां 13.25 प्रतिशत सदस्यों का ई-केवाईसी पूरा हुआ है। शिकारीपाड़ा में यह आंकड़ा 17.74 प्रतिशत और जामा में 30.46 प्रतिशत है। सरैयाहाट में 33.53 प्रतिशत, जरमुंडी में 34.05 प्रतिशत तथा रानीश्वर में 34.53 प्रतिशत प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी दी गई है।
इन छह कम प्रगति वाले प्रखंडों में नियमित निगरानी बढ़ाने की तैयारी है। जिला एवं प्रखंड स्तरीय टीमों को सामुदायिक कैडर के साथ तालमेल बनाकर काम करने और समूह तथा ग्राम संगठन स्तर पर लंबित मामलों की पहचान करने का निर्देश दिया गया है। संबंधित सदस्यों को निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने में सहयोग भी दिया जाएगा।
अन्य प्रखंडों में गोपीकांदर की प्रगति 39.20 प्रतिशत, रामगढ़ की 40.74 प्रतिशत और मसलिया की 49.38 प्रतिशत दर्ज की गई है। दुमका प्रखंड 71.04 प्रतिशत ई-केवाईसी के साथ जिले में सबसे आगे है। आंकड़े प्रखंडों के बीच प्रगति में बड़ा अंतर दिखाते हैं।
जिन स्वयं सहायता समूह सदस्यों का आधार ई-केवाईसी बाकी है, वे अपने समूह की अध्यक्ष या सचिव, बैंक सखी, बीसी सखी अथवा संबंधित प्रखंड कार्यालय से संपर्क कर सकती हैं। अभियान का लक्ष्य सभी पात्र सदस्यों की प्रक्रिया पूरी करना है, ताकि कोई भी सदस्य सत्यापन से वंचित न रहे।