दुमका जिले के सरैयाहाट प्रखंड स्थित महादेवगढ़ गांव की सरिता मरांडी ने देसी शराब बनाने और बेचने का काम छोड़कर स्वरोजगार की राह अपनाई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्होंने सब्जी की खेती और फास्ट फूड व्यवसाय से आय के नए साधन तैयार किए। अब वह आसपास की महिलाओं को भी वैकल्पिक और स्थायी आजीविका चुनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
सरिता के मुताबिक, परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति और नियमित आमदनी का साधन नहीं होने के कारण वह करीब छह वर्ष तक देसी शराब के कारोबार से जुड़ी रहीं। बाद में वह झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी के फूलो झानो आशीर्वाद अभियान से जुड़ीं। इस पहल के अंतर्गत उन्हें आर्थिक सहयोग, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिला।
अभियान से सरिता को 50 हजार रुपये का ब्याज-मुक्त आजीविका ऋण मिला। उन्होंने इस राशि से व्यावसायिक स्तर पर सब्जी की खेती शुरू की। खेती से आमदनी होने के बाद गांव में फास्ट फूड का व्यवसाय भी आरंभ किया और अपने काम को मजबूत करने के लिए एक टोटो वाहन खरीदा।
सरिता का कहना है कि इन गतिविधियों से अब उन्हें हर महीने लगभग 25 हजार रुपये से अधिक की नियमित आय हो रही है। इससे परिवार की जरूरतें पूरी करने और बच्चों की शिक्षा पर बेहतर ढंग से खर्च करने में मदद मिली है। आर्थिक स्थिरता ने उन्हें भविष्य की योजनाएं बनाने का भरोसा भी दिया है।
अक्टूबर 2025 से सरिता नव जीवन सखी कैडर के रूप में काम कर रही हैं। वह गांवों में जाकर देसी शराब के कारोबार से जुड़ी महिलाओं से अपने अनुभव साझा करती हैं और उन्हें दूसरे आजीविका विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। उनका प्रयास आर्थिक मदद के साथ महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने पर भी केंद्रित है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, महादेवगढ़ और आसपास के गांवों की 36 से अधिक महिलाएं उनसे प्रेरित होकर देसी शराब का काम छोड़ वैकल्पिक आजीविका की ओर बढ़ी हैं। सरिता की पहल स्थानीय स्तर पर महिला स्वरोजगार और सामाजिक बदलाव का उदाहरण बन रही है।