रांची में दुर्गा पूजा और दशहरा के दौरान सुरक्षा तथा भीड़ प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए पुलिस उपलब्ध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का सहारा लेने की तैयारी कर रही है। पूजा पंडालों, प्रमुख सड़कों और व्यस्त चौक-चौराहों की निगरानी में एआई आधारित सॉफ्टवेयर और टैबलेट तकनीक का उपयोग किया जा सकता है।
आईजी अभियान एवं पुलिस प्रवक्ता नरेंद्र सिंह के अनुसार, अधिकारियों से उपलब्ध एआई संसाधनों के इस्तेमाल का अनुरोध किया गया है। कंट्रोल रूम के बेहतर उपयोग पर भी जोर दिया गया है। हालांकि, राज्य में कितने स्थानों पर यह व्यवस्था लागू होगी और किन जिलों में जरूरी तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी, इसकी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
एआई आधारित प्रणाली के माध्यम से किसी स्थान पर मौजूद लोगों की संख्या का अनुमान लगाने और भीड़ का दबाव बढ़ने वाले क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। ऐसी जानकारी के आधार पर पुलिस अतिरिक्त जवानों की तैनाती, यातायात नियंत्रण और निगरानी बढ़ाने की जरूरत का आकलन कर सकेगी।
पुलिस रिकॉर्ड में मौजूद संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान के लिए फेस रिकग्निशन सुविधा के संभावित उपयोग की भी तैयारी है। कैमरों और संबंधित प्रणाली में जरूरी तकनीकी समन्वय होने पर निगरानी में आए चेहरों का उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान किया जा सकता है। यह व्यवस्था संकेत उपलब्ध कराएगी, जिनके आधार पर पुलिस आगे की निगरानी कर सकेगी।
भीड़ में परिवार से बिछड़े बच्चों की तलाश में भी तकनीक उपयोगी हो सकती है। बच्चे की तस्वीर उपलब्ध होने पर सक्षम प्रणाली निगरानी फुटेज में मिलती-जुलती तस्वीर खोजने में सहायता कर सकती है। बड़े पूजा पंडालों और मेलों में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस इस सुविधा को सुरक्षा व्यवस्था के सहायक माध्यम के रूप में देख रही है।
पुलिस के मुताबिक, देवघर के श्रावणी मेले में एआई आधारित कंट्रोल रूम का उपयोग भीड़ का अनुमान लगाने, संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखने और लापता बच्चों को खोजने में किया गया था। दुर्गा पूजा को लेकर रांची के साथ धनबाद और जमशेदपुर जैसे शहरों में भी तकनीक के इस्तेमाल की तैयारी बताई गई है।