लातेहार में आदिवासी महिला से कथित मारपीट की जांच के निर्देश, थाना प्रभारी ने आरोप नकारे

बरियातू क्षेत्र की एक महिला ने पुलिसकर्मियों पर मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद एसपी ने आवेदन मिलने और जांच कराए जाने की जानकारी दी है।

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लातेहार के बरियातू क्षेत्र में महिला की शिकायत पर जांच से संबंधित सांकेतिक दृश्य

लातेहार जिले के बरियातू क्षेत्र में एक आदिवासी महिला से कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पुलिस को तत्काल जांच करने का निर्देश दिया है। सोशल मीडिया पर घटना से संबंधित दावा सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने लातेहार पुलिस से उचित कार्रवाई करते हुए जानकारी देने को कहा। उपलब्ध सूचना के अनुसार, फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

हेरंज की रहने वाली महिला ने लातेहार के पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि 5 अक्टूबर की दोपहर वह गांव के पास बकरी चरा रही थी। इसी दौरान बरियातू थाने के थाना प्रभारी, एक मुंशी और वाहन चालक वहां पहुंचे। महिला का दावा है कि उसे पोस्ता कारोबार से जोड़ते हुए गाली-गलौज और मारपीट की गई।

आवेदन में महिला ने छेड़खानी, जंगल में रोके रखने और पैर बांधकर पेड़ से लटकाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उसने यह भी दावा किया कि बाद में उसे घर ले जाया गया और बेटी की शादी के लिए रखे 80 हजार रुपये ले लिए गए। महिला के मुताबिक, उसे अगले दिन रात में थाने से छोड़ा गया और पोस्ता कारोबार में शामिल होने की बात कहलवाकर मोबाइल से वीडियो बनाया गया।

एक सामाजिक संगठन ने भी सोशल मीडिया पर घटना को लेकर आरोप साझा किए थे। संगठन के अनुसार, महिला को रास्ते और थाने में पीटा गया तथा उसके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। ये सभी दावे शिकायतकर्ता और संगठन की ओर से लगाए गए आरोप हैं; जांच पूरी होने से पहले इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

मामले पर बरियातू थाना प्रभारी ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। दूसरी ओर, लातेहार के पुलिस अधीक्षक ने महिला का आवेदन मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है और जांच के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। उपलब्ध जानकारी में किसी पुलिसकर्मी के विरुद्ध कार्रवाई होने की पुष्टि नहीं की गई है।

मुख्यमंत्री के निर्देश और पुलिस अधीक्षक की ओर से जांच की बात कहे जाने के बाद अब शिकायत में दर्ज आरोपों, संबंधित अधिकारियों के पक्ष और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल पर ध्यान रहेगा। जांच के निष्कर्ष से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनाक्रम क्या था और मामले में आगे किस तरह की कार्रवाई की जाती है।