झारखंड हाईकोर्ट ने देवघर एम्स को पूरी तरह क्रियाशील बनाने के लिए राज्य सरकार को छह महीने के भीतर आवश्यक बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्य पूरे करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार से इन कार्यों की प्रगति और अनुपालन की जानकारी भी मांगी है। मामला सांसद निशिकांत दुबे की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है।
चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए एम्स में निर्बाध बिजली आपूर्ति की व्यवस्था पर विशेष निर्देश दिया। राज्य सरकार को अस्पताल के लिए 132/33 केवी क्षमता वाला समर्पित बिजली सब-स्टेशन स्थापित करने की दिशा में काम पूरा करना होगा।
अदालत ने जलापूर्ति की जरूरत को भी आदेश में शामिल किया है। सरकार को पुनासी डैम से देवघर एम्स तक सीधी और अलग जलापूर्ति लाइन बिछाने को कहा गया है। इसके साथ ही एम्स परिसर में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश भी दिया गया है।
अग्नि सुरक्षा मजबूत करने के लिए अस्पताल को ऐसी फायर फाइटिंग गाड़ी उपलब्ध कराने को कहा गया है जो 24 मंजिल तक पहुंचने में सक्षम हो। उपलब्ध विवरण के अनुसार, यह पांच से छह मंजिल वाली अग्निशमन गाड़ी होगी। इस व्यवस्था को भी निर्धारित छह महीने की अवधि में पूरा करने वाले कार्यों में रखा गया है।
खंडपीठ ने देवघर एम्स को अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई 20 एकड़ जमीन सौंपने का निर्देश दिया है। एम्स के पास रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण का काम भी इसी समय-सीमा में पूरा करने को कहा गया है। बिजली, पानी, अग्निशमन, जमीन और संपर्क सुविधा से जुड़े इन सभी बिंदुओं पर सरकार को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
अदालत ने निर्देश जारी करने के साथ जनहित याचिका का निष्पादन कर दिया। अनुपालन रिपोर्ट पर विचार के लिए अगली सुनवाई 13 मई 2027 को निर्धारित की गई है। इस प्रकार राज्य सरकार को तय अवधि में सुविधाओं से जुड़े काम आगे बढ़ाकर उनकी स्थिति अदालत के सामने रखनी होगी।