देवघर में जन्म पूर्व लिंग परीक्षण और कन्या भ्रूण हत्या जैसी गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने निगरानी कड़ी कर दी है। जिले में संचालित सभी 55 निबंधित अल्ट्रासाउंड केंद्रों का जिला स्तरीय टीम से औचक निरीक्षण कराया जा रहा है। अनियमितता मिलने पर संबंधित संस्थान के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यह निर्णय उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया की अध्यक्षता में उपायुक्त कार्यालय में हुई पीसी-पीएनडीटी एक्ट-1994 से संबंधित जिला सलाहकार समिति की बैठक में लिया गया। बैठक के दौरान विभिन्न अल्ट्रासाउंड केंद्रों से प्राप्त आवेदनों पर विचार किया गया। जांच पूरी होने के बाद इन आवेदनों पर नियमों के अनुसार निर्णय लेने पर सहमति बनी।
उपायुक्त ने अधिकारियों को लिंग परीक्षण से संबंधित निरीक्षणों की समेकित रिपोर्ट जिला कार्यालय में सौंपने का निर्देश दिया है। प्रशासन के अनुसार, यदि कोई संस्थान गैरकानूनी गतिविधि में शामिल पाया जाता है तो उसका लाइसेंस रद्द करने के साथ विधिसम्मत कार्रवाई भी की जाएगी।
बैठक में पीसी-पीएनडीटी वेबसाइट ‘गरिमा झारखंड’ पर ऑनलाइन फॉर्म-एफ के रखरखाव की जांच कराने को भी कहा गया। जिन केंद्रों ने 10 से कम गर्भवती महिलाओं के ऑनलाइन फॉर्म-एफ दर्ज किए हैं, उनकी विशेष जांच होगी। अधिकारियों को ऐसे केंद्रों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिला कार्यालय को उपलब्ध कराने का निर्देश मिला है।
समिति की बैठक में बताया गया कि पीसी-पीएनडीटी एक्ट के तहत प्रसव से पहले भ्रूण का लिंग निर्धारित करना या इसकी जानकारी देना पूरी तरह प्रतिबंधित है। नियमों के उल्लंघन पर तीन से पांच वर्ष तक की सजा और 10 हजार से 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान बताया गया। किसी केंद्र पर उल्लंघन सामने आने की स्थिति में कार्रवाई जांच के निष्कर्ष और लागू कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी।
बैठक में उप विकास आयुक्त पीयूष सिन्हा, सिविल सर्जन, संबंधित विभागों के अधिकारी, चिकित्सक और जिला सलाहकार समिति के सदस्य उपस्थित थे। प्रशासन ने निरीक्षणों के माध्यम से पंजीकरण, अभिलेखों और कानूनी प्रावधानों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने पर जोर दिया है।