देवघर नगर निगम के कर्मचारियों और पदाधिकारियों ने कुछ निर्वाचित पार्षदों के कथित अमर्यादित व्यवहार के विरोध में सात दिन के कार्य बहिष्कार की घोषणा की है। कर्मचारी संगठन के अनुसार, यह विरोध 16 सितंबर से शुरू होकर 22 सितंबर तक चलेगा। कर्मचारियों के काम से अलग रहने के कारण नगर निगम की सेवाएं और नियमित कार्यालयी कामकाज प्रभावित हो रहे हैं।
कर्मचारी संगठन का आरोप है कि निगम क्षेत्र के कुछ पार्षद कर्मचारियों से बातचीत के दौरान अनुचित और अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। संगठन ने कहा है कि ऐसे व्यवहार से कर्मचारी आहत हैं। इसी के विरोध में सामूहिक रूप से काम नहीं करने और हड़ताल पर रहने का निर्णय लिया गया है।
संगठन ने अपने फैसले की जानकारी पत्र के माध्यम से नगर निगम के अधिकारियों को दी है। पत्र में कार्य बहिष्कार की अवधि स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि 22 सितंबर तक विरोध जारी रहेगा। कर्मचारियों ने यह संकेत भी दिया है कि उनकी शिकायत पर संज्ञान नहीं लिया गया तो वे इसके बाद आंदोलन को और आगे बढ़ा सकते हैं।
देवघर के मेयर रवि रावत ने कहा कि उन्हें बुधवार को कर्मचारियों की नाराजगी और हड़ताल के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने मामले पर स्वयं संज्ञान लेने और कर्मचारी पक्ष से बातचीत करने की बात कही है। मेयर के मुताबिक, शिकायत की जांच में किसी पार्षद द्वारा अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
डिप्टी मेयर टिप चटर्जी ने स्वीकार किया कि कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार से आम लोगों को परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी संगठन और पार्षदों के बीच बातचीत कर विवाद का समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित संवाद के परिणाम को लेकर कोई निश्चित जानकारी सामने नहीं आई है।
नगर निगम से जुड़े नियमित कार्यों के लिए कार्यालय पहुंचने वाले लोगों पर हड़ताल का सीधा असर पड़ सकता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रभावित सेवाओं की अलग-अलग सूची नहीं दी गई है। कर्मचारियों की शिकायत, संबंधित पार्षदों का पक्ष और निगम स्तर पर होने वाली जांच के बाद ही विवाद की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।