पाकुड़ बाईपास के भूमि अधिग्रहण में तेजी के लिए 10 सदस्यीय समिति गठित

छह किलोमीटर लंबे पाकुड़ बाईपास का करीब आधा निर्माण पूरा हो चुका है। शेष भूमि उपलब्ध कराने और रैयतों के मुआवजा भुगतान में समन्वय के लिए जिला प्रशासन ने समिति बनाई है।

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पाकुड़ बाईपास निर्माण और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया का सांकेतिक दृश्य

पाकुड़ शहर के प्रस्तावित बाईपास का शेष निर्माण आगे बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज करने की पहल की है। अपर समाहर्ता जेम्स सुरीन की अध्यक्षता में गठित 10 सदस्यीय समिति मुआवजा भुगतान, आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने और निर्माण से जुड़े विभागों के बीच समन्वय का काम करेगी।

शाहड़कोल से प्यादापुर तक बनने वाली इस सड़क की लंबाई करीब छह किलोमीटर है और परियोजना की लागत लगभग 24 करोड़ रुपये बताई गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अब तक करीब 50 प्रतिशत निर्माण पूरा हुआ है। गोसाईंपुर तक सड़क बन चुकी है, जबकि आगे के हिस्से में भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया के कारण काम प्रभावित हुआ है।

बाईपास के लिए कुल 41.491 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। प्रस्तावित मार्ग 12 गांवों से होकर गुजरेगा। इनमें गोसाईंपुर, छोटी अलीगंज, नंदीपाड़ा, सुंदरपुर, चकबरामपुर और प्यादापुर भी शामिल हैं। संबंधित रैयतों को मुआवजा मिलने और जमीन उपलब्ध होने के बाद बाकी हिस्से में निर्माण आगे बढ़ सकेगा।

भूमि अधिग्रहण विभाग को पहले लगभग 5.38 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए थे। इसके अतिरिक्त करीब 14 करोड़ रुपये की मांग सरकार को भेजी गई थी, जिसे प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। नई समिति से भुगतान और भूमि हस्तांतरण से जुड़े लंबित कार्यों को एक साथ आगे बढ़ाने की उम्मीद है।

परियोजना का ऑनलाइन शिलान्यास मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 18 अगस्त 2024 को किया था। इसे नौ महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन आवश्यक भूमि की उपलब्धता से जुड़े काम के कारण तय अवधि में निर्माण पूरा नहीं हो सका। अब समिति की निगरानी में संबंधित प्रक्रियाओं को गति देने की तैयारी है।

बाईपास पूरा होने पर शहर के मुख्य मार्गों से गुजरने वाले वाहनों का दबाव कम होने की संभावना है। इससे पाकुड़ की यातायात व्यवस्था सुगम बनाने और स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने-जाने वाले वाहन चालकों को जाम से राहत दिलाने में मदद मिल सकती है।