देवघर में अनाज की कमी से सितंबर-अक्टूबर का राशन वितरण प्रभावित

एसएफसी गोदाम से करीब 22 हजार क्विंटल अनाज गायब होने के मामले के बीच देवघर के कई क्षेत्रों में कार्डधारियों को दो महीने का राशन नहीं मिल पाया है।

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देवघर में जन वितरण प्रणाली के राशन की प्रतीक्षा करते कार्डधारी

देवघर में राज्य खाद्य निगम के गोदाम से करीब 22 हजार क्विंटल अनाज गायब होने का मामला अब जन वितरण प्रणाली पर असर डाल रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर और अक्टूबर का राशन वितरण प्रभावित हुआ है। देवघर प्रखंड, मोहनपुर प्रखंड और नगर निगम क्षेत्र के कई कार्डधारियों को अनाज के लिए बार-बार राशन दुकानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

मामला देवघर की बाजार समिति के पास स्थित एसएफसी गोदाम से जुड़ा है। खाद्य आपूर्ति विभाग ने अनाज गायब होने के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई है। रिपोर्ट में अभी किसी गिरफ्तारी या अन्य ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं दी गई है। पूरे प्रकरण की जांच जारी रहने की बात कही गई है।

पीडीएस दुकानदार संघ के अध्यक्ष अभय चंद्र झा के मुताबिक, गोदाम में अनाज की कमी के कारण कई दुकानदारों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न नहीं मिला। पर्याप्त आपूर्ति नहीं पहुंचने से वे कार्डधारियों को समय पर राशन देने में असमर्थ हैं। दुकानों से खाली हाथ लौट रहे लाभुकों और राशन विक्रेताओं के बीच इसे लेकर नाराजगी भी बढ़ रही है।

दुकानदार संघ ने अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराते हुए सितंबर और अक्टूबर का बकाया अनाज उपलब्ध कराने की मांग की है। संघ का सुझाव है कि निर्धारित मासिक कोटे के अनुसार दोनों महीनों की लंबित मात्रा की चरणबद्ध आपूर्ति की जाए। वितरण की अवधि बढ़ाने की मांग भी सामने रखी गई है, ताकि पात्र परिवार अपना बकाया राशन प्राप्त कर सकें।

रिपोर्ट में दिए आंकड़ों के अनुसार, जिले में 970 जन वितरण प्रणाली दुकानें संचालित हैं। लाल कार्डधारियों के लिए प्रतिमाह करीब 61,447 क्विंटल चावल और ग्रीन कार्ड योजना के अंतर्गत लगभग 6,409 क्विंटल अनाज की जरूरत होती है। दोनों योजनाओं को मिलाकर जिले की मासिक आवश्यकता करीब 67,856 क्विंटल बताई गई है।

जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी प्रीति लता किस्कू ने स्वीकार किया कि गोदाम से अनाज गायब होने के कारण वितरण व्यवस्था पर असर पड़ा था। उनके अनुसार, राज्य सरकार और विभाग आपूर्ति को सामान्य करने का प्रयास कर रहे हैं। इस बीच सरकारी राशन पर निर्भर परिवार लंबित खाद्यान्न मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।