देवघर में संसदीय राजभाषा समिति ने केंद्रीय कार्यालयों और बैंकों में हिंदी के प्रयोग की समीक्षा की

संसदीय राजभाषा समिति की तीसरी उपसमिति ने 23 और 24 अक्टूबर को देवघर में बैठक कर केंद्रीय कार्यालयों व बैंकों में हिंदी के कार्यान्वयन की स्थिति पर चर्चा की।

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देवघर में आयोजित संसदीय राजभाषा समिति की दो दिवसीय बैठक

देवघर में संसदीय राजभाषा समिति की तीसरी उपसमिति की दो दिवसीय बैठक 23 और 24 अक्टूबर को आयोजित की गई। इस दौरान समिति ने देवघर और आसपास के क्षेत्रों में स्थित केंद्रीय सरकारी कार्यालयों तथा बैंकों में राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में सरकारी कामकाज में हिंदी का प्रयोग बढ़ाने और निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने पर जोर दिया गया।

बैठक की अध्यक्षता महाराष्ट्र के सांसद श्रीरंग अप्पा बारणे ने की। उपसमिति के सदस्य सतीश कुमार गौतम, ओम राजेन निंबालकर, नीरज डांगी, डॉ. धर्मशीला गुप्ता और जावेद अली खान के साथ समिति सचिवालय के अधिकारी भी इसमें शामिल हुए। प्रतिनिधियों ने विभिन्न संस्थानों में राजभाषा नीति के अनुपालन से जुड़े विषयों पर विचार किया।

निरीक्षण और समीक्षा के दौरान कार्यालयों में हिंदी में होने वाले पत्राचार, राजभाषा संबंधी प्रावधानों के पालन तथा तय लक्ष्यों की प्रगति पर चर्चा हुई। कर्मचारियों के बीच हिंदी साहित्य के प्रति रुचि विकसित करने के उद्देश्य से हिंदी पुस्तकों की खरीद को प्रोत्साहित करने का विषय भी बैठक में रखा गया।

दो दिनों की इस बैठक में संथाल परगना क्षेत्र में कार्यरत 24 संस्थानों के अधिकारी उपस्थित रहे। इनमें बीसीसीएल, एलआईसी, इंडियन बैंक और अन्य बैंकों के प्रतिनिधि शामिल थे। समिति ने अधिकारियों को कार्यालयीन कामकाज में हिंदी के प्रभावी प्रयोग के संबंध में निर्देश दिए।

समिति का नेतृत्व कर रहे सांसद श्रीरंग अप्पा बारणे ने हिंदी के साथ क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता भी बताई। बैठक में सरकार की ओर से 22 क्षेत्रीय भाषाओं के प्रोत्साहन की बात का उल्लेख हुआ और संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार दिशा-निर्देश देने पर चर्चा की गई।

बैठक के आयोजन और समन्वय की जिम्मेदारी इंडियन बैंक के देवघर अंचल कार्यालय को दी गई थी। बैंक की ओर से कॉर्पोरेट कार्यालय और अंचल कार्यालय के अधिकारियों ने भाग लिया। दो दिवसीय समीक्षा का केंद्र राजभाषा नीति का अनुपालन, हिंदी में सरकारी कार्य तथा क्षेत्रीय भाषाओं के प्रोत्साहन से जुड़े बिंदु रहे।