रामगढ़ में रविवार को बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की जयंती मनाई गई। ब्रह्मर्षि परिषद की ओर से आशेश्वर सिंह ब्रह्मर्षि धर्मशाला के सभागार में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष अजय मिश्रा ने की। उपस्थित लोगों ने डॉ. सिंह के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के जीवन, स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भागीदारी और प्रशासनिक कार्यों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि डॉ. सिंह प्रखर राष्ट्रवादी स्वतंत्रता सेनानी और कुशल प्रशासक थे। वक्ताओं ने महात्मा गांधी के नेतृत्व वाले स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान का भी उल्लेख किया।
सभा में उनके राजनीतिक जीवन पर चर्चा करते हुए बताया गया कि वह आजादी से पहले 1937 से 1946 तक बिहार के प्रीमियर रहे। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री का दायित्व संभाला। वक्ताओं ने उन्हें एकीकृत आधुनिक बिहार के निर्माण से जुड़े प्रमुख नेताओं में गिना।
परिषद के सदस्यों ने कहा कि डॉ. सिंह के कार्यकाल में औद्योगीकरण, शिक्षा, सिंचाई और सामाजिक सुधारों को बढ़ावा मिला। जमींदारी उन्मूलन से जुड़े कदमों को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि इन प्रयासों ने सामाजिक समरसता और आर्थिक बदलाव की दिशा में आधार तैयार किया। ये बातें कार्यक्रम में वक्ताओं द्वारा उनके योगदान के आकलन के रूप में रखी गईं।
परिषद के मीडिया प्रभारी सुरेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि डॉ. श्रीकृष्ण सिंह को व्यापक रूप से ‘श्री बाबू’ के नाम से जाना जाता था। उन्होंने उनके सार्वजनिक जीवन को राष्ट्र सेवा, सामाजिक न्याय और सुशासन के प्रति समर्पित बताया। कार्यक्रम में परिषद से जुड़े पदाधिकारियों, सदस्यों और शहर के अन्य लोगों ने भाग लिया।