देवघर में सजावटी मछली पालन से महिलाओं को स्वरोजगार देने की तैयारी, प्रशिक्षण के बाद मिलेगी किट

कृषि एवं मत्स्य विभाग की योजना के तहत देवघर के पांच क्षेत्रों से महिला समूह चुने जाएंगे। चयनित महिलाओं को रांची में प्रशिक्षण देकर आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने की तैयारी है।

2 मिनट पढ़ें 8 बार पढ़ी गई
देवघर में सजावटी रंगीन मछली पालन और एक्वेरियम प्रशिक्षण की प्रतीकात्मक तस्वीर

देवघर में महिलाओं को सजावटी मछली पालन से जोड़कर स्वरोजगार का अवसर देने की तैयारी शुरू की गई है। कृषि एवं मत्स्य विभाग की ‘मत्स्य प्रसार प्रशिक्षण एवं अनुसंधान योजना’ के तहत जिले के पांच क्षेत्रों में महिला समूहों का चयन किया जाएगा। योजना में खाने वाली मछलियों के बजाय एक्वेरियम में रखी जाने वाली रंगीन मछलियों के पालन पर जोर रहेगा।

चयनित महिलाओं को मछलियों की देखभाल, प्रजनन और एक्वेरियम तैयार करने से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। बेहतर प्रशिक्षण के लिए उन्हें रांची स्थित मत्स्य विभाग भेजने की योजना है। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, इच्छुक महिलाओं को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और प्रशिक्षण आगामी वर्ष से आरंभ किया जाना है।

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रत्येक चयनित महिला को लगभग 20 हजार रुपये मूल्य की आवश्यक किट देने का प्रावधान बताया गया है। इसके माध्यम से महिलाएं अपने घर से सजावटी मछली पालन शुरू कर सकेंगी। उन्हें विशेष टब में मछलियां पालने, एक्वेरियम बनाने और तैयार मछलियों को बाजार तक पहुंचाने के तौर-तरीके भी सिखाए जाएंगे।

जिला मत्स्य पदाधिकारी रणविजय सिंह के अनुसार, योजना से जुड़ने की इच्छुक महिलाओं के लिए विभाग ने विज्ञापन जारी किया है। आवेदन करने वाली महिलाओं में से लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। चयन और प्रशिक्षण के बाद विभाग की ओर से आवश्यक उपकरण तथा दूसरे संसाधन उपलब्ध कराए जाने हैं।

विभाग का आकलन है कि देवघर के बड़े होटलों, संस्थानों, घरों और अपार्टमेंटों में एक्वेरियम का चलन बढ़ने से सजावटी मछलियों के लिए स्थानीय बाजार बन रहा है। इसी संभावना को देखते हुए महिलाओं को पालन से लेकर बिक्री तक की गतिविधियों से जोड़ने की तैयारी है। प्रशिक्षण में एंजेल फिश, गोल्डन फिश और फाइटर फिश जैसी प्रजातियों की देखभाल की जानकारी भी दी जानी है।

स्थानीय महिला रूबी कुमारी ने योजना को घर से आमदनी का अवसर उपलब्ध कराने वाली पहल बताया और इसे जल्द लागू करने की मांग की। महिला सशक्तिकरण से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता प्राणु राय ने भी कहा कि ऑर्नामेंटल फिश फार्मिंग से अलग-अलग वर्गों की महिलाओं को लाभ मिल सकता है। फिलहाल कार्यक्रम आवेदन, पहचान और चयन के चरण में है; वास्तविक गतिविधियां प्रशिक्षण तथा किट वितरण के बाद शुरू होंगी।