देवघर में 18 करोड़ रुपये से बनेगा सात मंजिला पुलिस भवन, चार थाने एक परिसर में होंगे

साइबर थाने के पास प्रस्तावित बहुमंजिला भवन की निविदा प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। इसमें चार विशेष थानों के साथ पुलिसकर्मियों के लिए क्वार्टर और दूसरी सुविधाएं भी रहेंगी।

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देवघर में प्रस्तावित सात मंजिला पुलिस भवन का प्रतिनिधित्व करता दृश्य

देवघर में पुलिस की विशेष इकाइयों को एक परिसर में लाने के लिए सात मंजिला भवन बनाने की तैयारी है। करीब 18 करोड़ रुपये की लागत वाली यह इमारत साइबर थाने के पास उपलब्ध भूमि पर प्रस्तावित है। इसकी निविदा प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना बताई गई है।

प्रस्तावित भवन में महिला थाना, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति थाना, मानव तस्करी थाना और साइबर थाना संचालित किए जाएंगे। चारों थानों को एक ही परिसर में स्थान मिलने से संबंधित मामलों के लिए अलग-अलग स्थानों पर बनी मौजूदा व्यवस्था में बदलाव आएगा। भवन में अन्य आवश्यक सुविधाओं के साथ क्वार्टर बनाने की भी योजना है।

अभी देवघर का महिला थाना और साइबर थाना पुराने तथा जर्जर भवनों में चल रहे हैं। एससी-एसटी थाना कुंडा थाने के साथ जुड़ा हुआ है और जिले के एससी-एसटी मामलों की प्राथमिकी वहीं दर्ज होती है। मानव तस्करी से जुड़े मामलों के लिए फिलहाल अलग थाना उपलब्ध नहीं है। नया भवन बनने पर इन इकाइयों को निर्धारित स्थान मिल सकेगा।

बहुमंजिला परिसर तैयार होने के बाद पुराने थाना भवनों की जमीन भी खाली हो सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उस स्थान का उपयोग भविष्य में किसी अन्य निर्माण के लिए किया जा सकेगा। हालांकि पुराने परिसर में आगे क्या बनाया जाएगा, इसका विवरण अभी सामने नहीं आया है।

दूसरी ओर, डाबरग्राम स्थित पुलिस लाइन में पुलिसकर्मियों के ठहरने के लिए नए भवन बनाए गए हैं। पुरुष कर्मियों के लिए आठ बैरक तैयार किए गए हैं और प्रत्येक बैरक में लगभग 250 लोगों के रहने की जगह है। महिला पुलिसकर्मियों के लिए भी पांच बैरक बनाए गए हैं। श्रावणी मेले में बाहर से ड्यूटी पर आए कई कर्मियों को इन्हीं बैरकों में ठहराया गया।

पुलिस लाइन में अधिकारियों के लिए कुल 24 फ्लैटनुमा क्वार्टर भी बनाए गए हैं। एक भवन में करीब 12 क्वार्टर की व्यवस्था है। इसके अतिरिक्त वहां परेड ग्राउंड और चारदीवारी के निर्माण की भी योजना है। नई परियोजनाओं का उद्देश्य पुलिस इकाइयों को स्थायी कार्यस्थल और कर्मियों को बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है।