झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद की शिक्षिका मौसमी बिस्वास को राहत देते हुए उनके तबादले से जुड़े दो कार्यालय आदेश रद्द कर दिए हैं। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर तबादले को प्रथम दृष्टया दंडात्मक प्रकृति का माना और कहा कि ऐसा आदेश कानून की कसौटी पर कायम नहीं रह सकता।
मौसमी बिस्वास धनबाद के एसएसएलएनटी सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस गर्ल्स प्लस-2 हाई स्कूल में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक यानी टीजीटी के पद पर कार्यरत थीं। 22 जुलाई 2024 के आदेश के माध्यम से उनका स्थानांतरण अपग्रेडेड हाई स्कूल मोराडीह, निरसा कर दिया गया था।
तबादला आदेश जारी होने के दो दिन बाद, 24 जुलाई 2024 को एक अन्य कार्यालय आदेश के जरिए शिक्षिका को उनके तत्कालीन पद से विरमित कर नई जगह योगदान देने को कहा गया था। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके इन आदेशों की वैधता को चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ रंजन ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। उनकी दलील थी कि तबादले की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं थी, इसलिए 22 जुलाई और 24 जुलाई 2024 को जारी दोनों संबंधित आदेशों को निरस्त किया जाना चाहिए।
मामले में राज्य सरकार की ओर से जवाबी हलफनामा भी दाखिल किया गया था। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष तबादला आदेश के दंडात्मक प्रकृति का होने संबंधी तथ्य को खारिज नहीं कर सका। अदालत ने रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद शिक्षिका के पक्ष में फैसला दिया।
हाईकोर्ट के निर्णय के साथ ही शिक्षिका के तबादले और नई जगह योगदान के लिए विरमित किए जाने से जुड़े दोनों कार्यालय आदेश प्रभावहीन हो गए हैं। अदालत का यह फैसला मौसमी बिस्वास द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद आया है।