धनबाद के बरमसिया मोहल्ले में रहने वाले सियारो नामक कुत्ते की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने सामूहिक रूप से उसे अंतिम विदाई दी। वर्षों से मोहल्ले में रह रहे सियारो के प्रति लोगों के लगाव के कारण अंतिम संस्कार में बच्चों और अन्य निवासियों ने भी भाग लिया। इस दौरान कई बच्चे भावुक हो गए।
स्थानीय निवासी उमेश कुमार के अनुसार, सियारो की मौत 25 अक्टूबर को हुई थी। वह लंबे समय से बरमसिया में लोगों के बीच रहता था। मोहल्ले के निवासी उसे केवल एक जानवर के रूप में नहीं देखते थे, बल्कि अपने परिवार और आसपास के सामाजिक जीवन का हिस्सा मानते थे।
मौत के बाद मोहल्ले के लोगों ने आपसी सहयोग से अंतिम संस्कार की व्यवस्था की। विदाई के दौरान गाजे-बाजे का भी प्रबंध किया गया। आयोजन में शामिल निवासियों ने सियारो के साथ अपने जुड़ाव को व्यक्त किया और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया सामूहिक रूप से पूरी की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सियारो अपने सहज और मिलनसार व्यवहार के कारण बच्चों सहित मोहल्ले के कई परिवारों से घुला-मिला था। रोजमर्रा की गतिविधियों में उसकी मौजूदगी परिचित हो चुकी थी। इसी कारण उसकी मौत की सूचना मिलने पर पूरे इलाके में दुख का माहौल रहा।
मोहल्ले के निवासियों ने सियारो की स्मृति में छह नवंबर को भोज आयोजित करने का निर्णय भी लिया है। प्रस्तावित आयोजन में स्थानीय लोग एकत्र होकर उसके साथ बिताए समय को याद करेंगे। इसकी तैयारी भी सामूहिक सहयोग से करने की बात कही गई है।
बरमसिया में किया गया यह आयोजन मनुष्य और पालतू या आसपास रहने वाले पशुओं के बीच बनने वाले भावनात्मक संबंध को सामने लाता है। सियारो की विदाई में मोहल्ले की भागीदारी और उसकी स्मृति में भोज का निर्णय स्थानीय समुदाय के उससे गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।