रांची में बस से 13 साल पहले शुरू हुई थी रेल सेवा, पुरुलिया तक लगते थे 14 घंटे

रांची में रेल यात्रा की सुविधा 1907 में शुरू हुई, जबकि पहली यात्री बस 1920 में हजारीबाग के लिए चली। इससे पहले बैलगाड़ी, घोड़ागाड़ी और पैदल सफर प्रमुख साधन थे।

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रांची की पुरानी रेल और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का सांकेतिक दृश्य

रांची में संगठित यात्री बस सेवा शुरू होने से करीब 13 साल पहले ही रेल यात्रा की सुविधा उपलब्ध हो गई थी। ब्रिटिश शासन के दौरान रांची और पुरुलिया के बीच रेल लाइन का निर्माण 1905 में शुरू हुआ और 14 नवंबर 1907 को इसका उद्घाटन किया गया। इस संपर्क से रांची से कोलकाता की ओर जाने वाले यात्रियों को नया विकल्प मिला, हालांकि उस समय रेल यात्रा भी आज की तुलना में काफी लंबी होती थी।

रांची से पुरुलिया जाने वाली ट्रेन रांची और पुरुलिया के अलावा टाटीसिल्वे, गंगाघाट, जोन्हा और सिल्ली स्टेशनों पर रुकती थी। दोनों शहरों के बीच यात्रा पूरी करने में लगभग 14 घंटे लगते थे। बाद में इस रेल संपर्क का विस्तार लोहरदगा की ओर किया गया। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, उस दौर में रांची से लोहरदगा पहुंचने में भी सात से आठ घंटे का समय लगता था।

रेल सेवा से पहले छोटानागपुर क्षेत्र में लंबी दूरी की यात्रा का आधार सीमित सड़कें और पगडंडियां थीं। बैलगाड़ी और घोड़ागाड़ी प्रमुख साधन माने जाते थे, लेकिन इनका उपयोग मुख्य रूप से संपन्न परिवार, जमींदार और ब्रिटिश अधिकारी करते थे। आम लोगों में से कई समूह बनाकर पैदल यात्रा करते थे। कोलकाता, दिल्ली, मुंबई, मद्रास और जयपुर जैसे दूरस्थ शहरों तक जाना कठिन और समय लेने वाला था।

रांची में यात्री बस सेवा की शुरुआत 1920 में हुई। पहली बस रांची से हजारीबाग के बीच चलाई गई और कुछ समय बाद पुरुलिया के लिए भी परिचालन शुरू हुआ। इसके बाद अन्य शहरों के लिए बस सेवाओं का विस्तार हुआ। इससे उन यात्रियों को सुविधा मिली जिन्हें पहले छोटी और लंबी दूरी के सफर के लिए पैदल, बैलगाड़ी या घोड़ागाड़ी पर निर्भर रहना पड़ता था।

वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ रांची में करीब 1925 में पेट्रोल पंप स्थापित होने का उल्लेख मिलता है। बिजली और आधुनिक मीटर वाली मशीनें उपलब्ध नहीं होने के कारण पेट्रोल को ड्रम से हाथ से चलने वाले पंप की मदद से शीशे के बड़े सिलेंडरों में नापा जाता था। शुरुआती ग्राहकों में ब्रिटिश अधिकारी, स्थानीय जमींदार, मिशन की एंबुलेंस और जमशेदपुर या पुरुलिया जाने वाली बसें शामिल थीं।

रांची की परिवहन व्यवस्था का यह क्रम बताता है कि शहर में पहले रेल संपर्क विकसित हुआ और उसके बाद सड़क आधारित सार्वजनिक यातायात का विस्तार हुआ। सीमित पगडंडियों तथा पशुचालित गाड़ियों से शुरू हुआ सफर रेल और बस सेवाओं तक पहुंचा, जिसने रांची को आसपास के शहरों और बड़े यात्रा मार्गों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।