धनबाद के बरमसिया में इस वर्ष दुर्गा पूजा के दौरान पाठ्य सामग्री से तैयार मां दुर्गा की प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। प्रतिमा को आकार देने में पेंसिल, उसके छोटे टुकड़ों और छिलकों के साथ शार्पनर तथा इरेजर का कलात्मक ढंग से इस्तेमाल किया गया है। इसे देखने के लिए लोग पूजा पंडाल पहुंच रहे हैं।
प्रतिमा के निर्माण के लिए बिहार के गया से कारीगर बुलाए गए थे। पूजा समिति के सदस्य राहुल मिश्रा के अनुसार, इसे तैयार करने में लगभग एक लाख रुपये खर्च हुए हैं। पेंसिल के टुकड़ों और छिलकों को सजाकर प्रतिमा की अलग बनावट तैयार की गई है, जबकि शार्पनर और इरेजर का उपयोग सजावटी हिस्सों में किया गया है।
बरमसिया में दुर्गा पूजा का आयोजन पिछले 56 वर्षों से किया जा रहा है। यहां की पूजा समिति प्रतिमा निर्माण में हर वर्ष अलग सामग्री और नई शैली अपनाती रही है। इससे पहले दवाओं से जुड़ी सामग्री और बिंदी का प्रयोग कर भी प्रतिमाएं बनाई जा चुकी हैं। इस बार समिति ने पढ़ाई-लिखाई में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं को अपनी कलाकृति का आधार बनाया है।
पंडित तापस घोषाल के मुताबिक, मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के लिए 1,200 भक्तों ने थाली अर्पित की है। पूजा कार्यक्रमों के बीच सोमवार को लोयाबाद से राम-रहीम की जोड़ी भी प्रतिमा के दर्शन के लिए बरमसिया पहुंची। समिति के पदाधिकारियों ने उन्हें माता की चुनरी और तस्वीर देकर सम्मानित किया।
आयोजन में समिति के अध्यक्ष मदन महतो, कल्लू चौधरी, सचिव रमेश राय और कोषाध्यक्ष अमित पंडित सहित अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। पेंसिल और दूसरी सामान्य पाठ्य सामग्री को धार्मिक कलाकृति का रूप देने वाला यह प्रयोग बरमसिया की वर्षों पुरानी पूजा परंपरा में इस बार की प्रमुख विशेषता बनकर सामने आया है।