धनबाद के बरवाअड्डा हवाई अड्डा परिसर में झारखंड का पहला एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित संस्थान में विमान के रखरखाव से जुड़े तकनीकी पाठ्यक्रम संचालित होंगे। हालांकि कॉलेज का संचालन शुरू करने के लिए नागर विमानन महानिदेशालय यानी डीजीसीए की अनुमति मिलना अभी बाकी है।
राज्य सरकार ने संस्थान के संचालन के लिए नई दिल्ली की वैन्योर एयर प्राइवेट लिमिटेड के साथ करार किया है। समझौते के तहत छात्रों की पढ़ाई और व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ कॉलेज से जुड़े प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी भी इसी एजेंसी के पास रहेगी।
कॉलेज के लिए आवश्यक शैक्षणिक ढांचा बरवाअड्डा हवाई अड्डा परिसर में उपलब्ध भवनों से पूरा किए जाने की उम्मीद है। विद्यार्थियों के आवास के लिए छात्रावास बनवाने अथवा किसी बाहरी एजेंसी से व्यवस्था करने की जिम्मेदारी भी चयनित कंपनी को दी गई है।
प्रस्तावित पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित विषयों के साथ बारहवीं उत्तीर्ण होना आवश्यक होगा। अभ्यर्थियों के लिए बारहवीं कक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक की शर्त बताई गई है। संस्थान से प्रशिक्षण लेने वाले विद्यार्थियों के लिए विमानन कंपनियों में तकनीकी कार्य के अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।
एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग की मैकेनिकल स्ट्रीम में विमान के इंजन, एयरफ्रेम और दूसरे यांत्रिक हिस्सों से संबंधित काम सिखाया जाएगा। एवियोनिक्स पाठ्यक्रम में इलेक्ट्रिकल प्रणाली, रेडियो, नेविगेशन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच एवं रखरखाव का प्रशिक्षण शामिल होगा।
राज्य सरकार ने अनुमति की प्रक्रिया को लेकर डीजीसीए के अधिकारियों के साथ बातचीत शुरू कर दी है। इसी महीने इस विषय पर वार्ता होने की संभावना बताई गई है। मंजूरी मिलने के बाद ही कॉलेज खोलने और प्रशिक्षण शुरू करने की समय-सारणी स्पष्ट हो सकेगी।