पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड में ग्राम सभा और स्थानीय संगठनों की पहल से दो नाबालिग विद्यार्थियों का बाल विवाह रोक दिया गया। घोड़ाबंधा गांव में मंगलवार को हुई बैठक के बाद दोनों परिवार इस बात पर सहमत हुए कि छात्र और छात्रा अलग-अलग रहकर अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे।
घोड़ाबंधा पंचायत का छात्र और खड़पोस पंचायत के पोंडुवाबुरू गांव की छात्रा दसवीं कक्षा में पढ़ते हैं। दोनों ने विवाह कर लिया था और एक साथ रहने लगे थे। इसकी सूचना मिलने पर बाल अधिकार सुरक्षा मंच, प्रखंड विकास पदाधिकारी और एस्पायर संस्था से जुड़े सदस्य सक्रिय हुए।
प्रतिनिधियों ने छात्र के घर पहुंचकर दोनों पक्षों के परिजनों को एक जगह बुलाया। इसके बाद स्थानीय ग्रामीण मुंडा सोनाराम हेंब्रम की अध्यक्षता में विशेष ग्राम सभा आयोजित की गई। बैठक में परिवारों को बाल विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और बच्चों के भविष्य पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी गई।
बातचीत के बाद दोनों परिवारों ने ग्राम सभा का निर्णय स्वीकार कर लिया। सभा में तय किया गया कि 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक दोनों विद्यार्थी अलग रहेंगे और अपने-अपने विद्यालयों में पढ़ाई जारी रखेंगे। परिवार बच्चों पर दबाव नहीं डालेंगे और उनकी शिक्षा में बाधा भी नहीं बनने देंगे।
बैठक में पंचायत स्तर पर बाल विवाह के संभावित मामलों की निगरानी बढ़ाने का फैसला भी हुआ। ग्रामीणों से कहा गया कि ऐसा कोई मामला सामने आने पर बाल अधिकार सुरक्षा मंच, पंचायत प्रतिनिधियों और प्रशासन को तुरंत सूचना दी जाए। गांव के लोगों ने क्षेत्र को बाल विवाह से मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया।
इस पहल में मझगांव प्रखंड बाल अधिकार सुरक्षा मंच के अध्यक्ष मनोज हेंब्रम, घोड़ाबंधा पंचायत के मुखिया विवेकानंद पूर्ति और खड़पोस पंचायत के मुखिया प्रताप चातार भी उपस्थित रहे। सामूहिक हस्तक्षेप के बाद दोनों विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने पर बनी सहमति को मामले का प्रमुख परिणाम माना गया।