धनबाद के बलियापुर में करमा पर्व की तैयारी, गीत-नृत्य के अभ्यास में जुटीं महिलाएं

बलियापुर सहित झारखंड के ग्रामीण इलाकों में 22 सितंबर के करमा पर्व की तैयारी शुरू हो गई है। महिलाएं और युवतियां पारंपरिक गीत तथा नृत्य का अभ्यास कर रही हैं।

2 मिनट पढ़ें 1 बार पढ़ी गई
धनबाद के बलियापुर में करमा पर्व के लिए गीत और नृत्य का अभ्यास करती महिलाएं

धनबाद के बलियापुर में करमा पर्व की तैयारियां तेज हो गई हैं। महिलाएं और युवतियां समूह बनाकर पारंपरिक गीतों और नृत्य का अभ्यास कर रही हैं। गांवों के अखड़ों, खेतों की मेड़ों और पूजा स्थलों के आसपास मांदर की थाप सुनाई देने लगी है। इस वर्ष करमा पर्व 22 सितंबर को मनाया जाएगा।

तैयारियों के बीच लोकप्रिय लोकगीत “आज रे करम गोसाईं” के स्वर भी सुनाई दे रहे हैं। यह गीत करम देवता के स्वागत और घर-आंगन में उनके आगमन की भावना से जुड़ा है। इसकी सहज धुन और सामूहिक गायन की शैली के कारण करमा पर्व के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में इसे प्रमुखता से गाया जाता है।

इस लोकगीत को किसी एक रचनाकार से जोड़ना कठिन है। उपलब्ध संदर्भों में इसे पीढ़ियों से मौखिक रूप में आगे बढ़ते पारंपरिक गीत के तौर पर दर्ज किया गया है। अलग-अलग इलाकों में इसके शब्दों, उच्चारण और धुन में कुछ बदलाव मिलते हैं, जिन्हें स्थानीय लोकपरंपरा का स्वाभाविक हिस्सा माना जाता है।

करमा गीतों के गायन की अपनी सामूहिक शैली है। आम तौर पर महिलाओं या युवतियों का एक समूह पहली पंक्ति उठाता है और दूसरा समूह उसे दोहराता है। मांदर, ढोलक और अन्य पारंपरिक वाद्यों की ताल के साथ प्रतिभागी हाथ पकड़कर या कदम मिलाते हुए गोल घेरे में नृत्य करते हैं।

पर्व से पहले जावा तैयार करने और करम डाल की पूजा से जुड़ी व्यवस्थाएं भी शुरू हो जाती हैं। करमा के दिन करम डाल को अखड़े या निर्धारित पूजा स्थल पर स्थापित कर पारंपरिक विधि से पूजा की जाती है। गीतों में प्रकृति, खेती-बारी, भाई-बहन के संबंध और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना प्रमुख रूप से उभरती है।

करमा पर्व झारखंड के आदिवासी और अनेक ग्रामीण समुदायों के सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुंडा, उरांव, हो, खड़िया, बिरहोर और कुड़मी-कुर्मी समुदायों में इसे मनाने की परंपरा रही है। बलियापुर में चल रहा अभ्यास बताता है कि पर्व की तैयारी केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकगीत, वाद्य और सामूहिक नृत्य भी इसके अभिन्न अंग हैं।