धनबाद के एक जमीन विवाद में झारखंड हाईकोर्ट ने निचली अदालत के 26 अगस्त के आदेश को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने अस्थायी निषेधाज्ञा से संबंधित आवेदन को दोबारा बहाल करते हुए उस पर नए सिरे से सुनवाई का निर्देश दिया। निचली अदालत को दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देने के बाद नया आदेश पारित करना होगा।
जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने सुभाष कुमार चौधरी की ओर से दायर अपील पर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया। संबंधित मूल वाद धनबाद के सिविल जज (वरीय श्रेणी) की अदालत में लंबित है। मामले में वादियों ने विवादित जमीन पर अपने अधिकार की घोषणा और कुछ पंजीकृत बिक्री विलेखों को रद्द करने की मांग की है।
वादियों ने स्थायी तथा अनिवार्य निषेधाज्ञा जारी करने का आग्रह भी किया है। इसके साथ ही सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 39 के नियम 1 और 2 के तहत आवेदन देकर मुकदमे के दौरान जमीन की बिक्री, कब्जा हटाने और किसी तरह के निर्माण पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
निचली अदालत ने 26 अगस्त को अस्थायी निषेधाज्ञा का आवेदन खारिज कर दिया था। हालांकि, उसी आदेश में मुकदमे के अंतिम निपटारे तक विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश भी दिया गया। इस आदेश को अपील के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि निचली अदालत के दोनों निष्कर्ष आपस में संगत नहीं हैं। एक ओर प्रथमदृष्टया मामला और सुविधा का संतुलन वादियों के पक्ष में साबित नहीं होने की बात कही गई, जबकि दूसरी ओर जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया गया। हाईकोर्ट के अनुसार, ऐसी स्थिति में यथास्थिति का निर्देश कानूनी रूप से उचित नहीं था।
हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत का आदेश निरस्त कर दिया और अस्थायी निषेधाज्ञा का आवेदन पुनः सुनवाई के लिए बहाल कर दिया। अब निचली अदालत को आवेदन पर दोनों पक्षों की दलीलें सुननी होंगी। इसके बाद उपलब्ध तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर नया आदेश पारित किया जाएगा।