धनबाद बाजार समिति की दुकानों का किराया नवंबर से नौ रुपये प्रति वर्गफुट

धनबाद कृषि उत्पादन बाजार समिति को प्रथम श्रेणी में रखते हुए दुकानों की किराया दर चार से बढ़ाकर नौ रुपये प्रति वर्गफुट की गई है। नई दर से 436 दुकानदार प्रभावित होंगे।

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धनबाद कृषि उत्पादन बाजार समिति का परिसर और वहां स्थित दुकानें

धनबाद कृषि उत्पादन बाजार समिति की छोटी-बड़ी दुकानों का किराया नवंबर से नौ रुपये प्रति वर्गफुट की दर से वसूला जाएगा। अभी दुकानदार चार रुपये प्रति वर्गफुट किराया दे रहे हैं। नई दर लागू होने पर समिति परिसर में कारोबार करने वाले 436 दुकानदार प्रभावित होंगे।

किराया बढ़ाने का निर्णय झारखंड राज्य कृषि विपणन पर्षद बोर्ड ने लिया है। राज्य की 28 बाजार समितियों को किराया निर्धारण के लिए तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी के लिए नौ रुपये, दूसरी के लिए सात रुपये और तीसरी के लिए पांच रुपये प्रति वर्गफुट की दर तय की गई है। धनबाद को पहली श्रेणी में रखा गया है।

नई व्यवस्था में प्रत्येक दुकानदार को उसकी दुकान के क्षेत्रफल के आधार पर भुगतान करना होगा। इस कारण बड़ी दुकानों का संचालन करने वाले कारोबारियों की देनदारी अपेक्षाकृत अधिक बढ़ेगी। बाजार समिति के विपणन सचिव ने बताया कि बढ़ी हुई दर नवंबर से लागू की जाएगी।

दुकानदारों के अनुसार, धनबाद कृषि उत्पादन बाजार समिति की स्थापना 1984 में हुई थी और शुरुआती दौर में दुकानों के आकार के अनुसार किराया तय होता था। वर्ष 1997 में फल मंडी के परिसर में आने के बाद दर 1.25 रुपये प्रति वर्गफुट निर्धारित हुई। करीब 2003 में इसे दो रुपये और 2007 में चार रुपये प्रति वर्गफुट किया गया था।

वर्ष 2007 की वृद्धि का दुकानदारों और विभिन्न चेंबरों ने विरोध किया था। विवाद सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा, जहां निर्णय कृषि विपणन बोर्ड के पक्ष में रहा। इसके बाद अब तक चार रुपये प्रति वर्गफुट की दर से किराया लिया जा रहा था। नई दर मौजूदा किराये से 125 प्रतिशत अधिक है।

व्यापारियों ने लंबे अंतराल के बाद एक साथ हुई इस वृद्धि पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि किराये में अचानक बढ़ोतरी से कारोबार पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा। कुछ कारोबारियों ने दर तय करने से पहले व्यापारियों के साथ विचार-विमर्श किए जाने की जरूरत बताई है।