धनबाद में असुरक्षित गर्भपात के बाद विवाहिता की मौत, पति और नर्स समेत चार गिरफ्तार

कतरास के श्यामडीह में 24 वर्षीय विवाहिता की मौत के मामले में पुलिस ने पति, नर्स और डायग्नोस्टिक सेंटर से जुड़े दो लोगों को गिरफ्तार किया है। लिंग जांच और दबाव डालकर गर्भपात कराने के आरोपों की जांच जारी है।

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धनबाद के कतरास में विवाहिता की मौत के मामले की जांच करती पुलिस का सांकेतिक दृश्य

धनबाद जिले के कतरास थाना क्षेत्र में असुरक्षित गर्भपात के बाद 24 वर्षीय विवाहिता की मौत का मामला सामने आया है। मृतका के पिता की शिकायत पर पुलिस ने पति, ससुराल पक्ष के सदस्यों, डायग्नोस्टिक सेंटर से जुड़े लोगों और मेडिकल स्टाफ समेत कई आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मामले में चार लोगों को गिरफ्तार कर धनबाद मंडल कारा भेजा गया है।

शिकायत के अनुसार, बोकारो जिले के पेटरवार थाना क्षेत्र की चलकारी बस्ती निवासी विवाहिता गर्भवती थीं। आरोप है कि पति और ससुराल के लोगों ने उन पर गर्भस्थ शिशु की लिंग जांच कराने का दबाव बनाया। जांच में लड़की होने की जानकारी मिलने के बाद गर्भपात कराने का आरोप लगाया गया है। इन दावों की पुलिस जांच कर रही है।

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि श्यामडीह स्थित एक डायग्नोस्टिक सेंटर में लैब टेक्नीशियन और नर्स को बुलाकर असुरक्षित तरीके से गर्भपात कराया गया। इसके बाद विवाहिता की तबीयत तेजी से बिगड़ी। उन्हें श्यामडीह के संजीवनी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लिया। मृतका के पिता के लिखित आवेदन पर कतरास थाने में 29 अक्टूबर को मामला दर्ज किया गया। प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता के साथ पीसीपीएनडीटी अधिनियम, 1994 और एमटीपी अधिनियम की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।

पुलिस ने जिन चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें विवाहिता का पति, एक डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक, अल्ट्रासाउंड स्टाफ का एक सदस्य और एक नर्स शामिल हैं। शिकायत में ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों, डायग्नोस्टिक सेंटर संचालकों तथा चिकित्सा कर्मियों को भी नामजद किया गया है।

पुलिस के मुताबिक, मामले का अनुसंधान जारी है और अन्य नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। लिंग जांच, गर्भपात की परिस्थितियों और इसमें अलग-अलग लोगों की कथित भूमिका से जुड़े आरोप अभी जांच के अधीन हैं। अंतिम निष्कर्ष पुलिस अनुसंधान और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।