धनबाद में वन्यजीवों के अंगों और उनसे जुड़ी वस्तुओं की कथित खरीद-बिक्री का मामला सामने आया है। वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। विभाग के अनुसार, उनके पास से जानवरों के नाखून, चमड़े और वन्यजीवों से संबंधित अन्य सामान बरामद किए गए हैं। मामले में आगे की जांच जारी है।
मीडिया रिपोर्ट में वन विभाग के हवाले से बताया गया है कि कार्रवाई के दौरान कुल 70 वन्यजीव उत्पाद मिले हैं। विभाग ने इन वस्तुओं का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 50 लाख रुपये बताया है। हालांकि, बरामद सामग्री की प्रकृति और उससे जुड़े सभी पहलुओं की जांच अभी पूरी नहीं हुई है।
बरामद सामान में कैट फैमिली से संबंधित बताए जा रहे कुछ अंग भी शामिल हैं। इनकी सटीक पहचान के लिए नमूने देहरादून स्थित जांच केंद्र भेजे जाएंगे। वैज्ञानिक परीक्षण से यह पता लगाने का प्रयास होगा कि संबंधित अंग बाघ के हैं या चीते के। जांच रिपोर्ट आने से पहले उनकी प्रजाति को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।
धनबाद के वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास पालीवाल के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों पर वन्यजीवों से संबंधित वस्तुओं की खरीद-बिक्री में शामिल होने का आरोप है। उन्होंने बताया कि मामले में वन विभाग की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। विभाग बरामद वस्तुओं और उनसे संबंधित दूसरे तथ्यों की भी पड़ताल कर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, वन प्रमंडल पदाधिकारी ने गुरुवार शाम नावाडीह स्थित वन प्रमंडल कार्यालय में प्रेस वार्ता कर विस्तृत जानकारी देने की बात कही है। इसमें गिरफ्तारी, बरामद सामग्री और आगे की विभागीय कार्रवाई के संबंध में अतिरिक्त तथ्य सामने आने की संभावना है। फिलहाल आरोपों की कानूनी पुष्टि जांच और संबंधित प्रक्रिया के बाद ही होगी।
इस कार्रवाई के बाद धनबाद में वन्यजीवों से जुड़े प्रतिबंधित सामान की कथित खरीद-बिक्री का विषय सामने आया है। जांच का प्रमुख हिस्सा बरामद अंगों की प्रमाणिक पहचान और उनके स्रोत से संबंधित तथ्यों को स्पष्ट करना होगा। वन विभाग की आगे की कार्रवाई परीक्षण के निष्कर्षों और जांच में मिलने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।