धनबाद सड़क हादसा मामले में आश्रितों का मुआवजा बढ़कर 25.55 लाख रुपये

झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद के सड़क हादसे से जुड़े मामले में मृतक के आश्रितों का मुआवजा बढ़ाया और बीमा कंपनी की दलील खारिज कर दी।

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झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद के एक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति के आश्रितों को मिलने वाला मुआवजा बढ़ाकर 25,55,500 रुपये कर दिया है। बुधवार को सुनाए गए फैसले में अदालत ने बीमा कंपनी को राहत देने से इनकार किया। मामला बांसजोरा निवासी सुरेंद्र पाठक की सड़क दुर्घटना में हुई मौत से संबंधित है।

मामले में धनबाद मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने 26 सितंबर 2016 को सुरेंद्र पाठक की पत्नी माया देवी और तीन बच्चों के पक्ष में 20,16,456 रुपये का मुआवजा तय किया था। इस राशि पर 8 सितंबर 2014 से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश था।

बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि दुर्घटना के समय ट्रक चालक मंटू प्रसाद दत्ता के पास वैध और प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। कंपनी ने इसे बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन बताते हुए पहले भुगतान करने और बाद में वाहन मालिक से रकम वसूलने की अनुमति मांगी थी।

चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अदालत ने कहा कि चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं होने का दावा करने वाली बीमा कंपनी को इसे ठोस साक्ष्य से साबित करना होगा। अदालत के अनुसार, केवल आरोप लगा देना कंपनी को उसकी कानूनी जिम्मेदारी से मुक्त करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

हाईकोर्ट ने मुआवजे की गणना में मृतक की मासिक आय 20,777 रुपये और उम्र 54 वर्ष मानी। भविष्य की संभावित आय के लिए 15 प्रतिशत की वृद्धि जोड़ने के बाद आश्रितों की क्षति 23,65,462 रुपये निर्धारित की गई।

इसके अलावा पत्नी और तीन बच्चों के लिए 40-40 हजार रुपये की दर से कुल 1.60 लाख रुपये कंसोर्टियम के मद में जोड़े गए। अंतिम संस्कार और संपत्ति के नुकसान के लिए 15-15 हजार रुपये तय किए गए। इस प्रकार कुल राशि 25,55,462 रुपये बनी, जिसे अदालत ने पूर्णांक में 25,55,500 रुपये कर दिया।