धनबाद और हावड़ा के बीच चलने वाली एसी डबल डेकर ट्रेन अब दोबारा पटरी पर नहीं लौटेगी। रेलवे बोर्ड की अनुमति मिलने के बाद पूर्व रेलवे ने इसे स्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है। लंबे समय से हावड़ा के पास यार्ड में खड़ी इस ट्रेन को अब स्क्रैप करने की तैयारी की जा रही है।
देश की पहली एसी डबल डेकर के रूप में इस ट्रेन का परिचालन एक अक्टूबर 2011 को शुरू हुआ था। तत्कालीन रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने हावड़ा स्टेशन से इसे हरी झंडी दिखाई थी। शुरुआत के समय ट्रेन के स्वरूप और दो मंजिला डिजाइन को लेकर यात्रियों में खासा उत्साह देखा गया था।
हालांकि, इसका परिचालन लंबे समय तक जारी नहीं रह सका। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अधिक किराया और यात्रियों के अनुकूल समय नहीं होने के कारण ट्रेन लगातार नुकसान में चल रही थी। इसके बाद रेलवे ने इसका संचालन बंद कर दिया और वर्ष 2014 से इसके डिब्बे हावड़ा यार्ड में खड़े थे।
हाल में हुई पीसीएमई कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व रेलवे ने वर्षों से यार्ड में खड़ी इस ट्रेन के संबंध में रेलवे बोर्ड से समाधान मांगा था। इससे इसके दोबारा परिचालन की संभावना को लेकर उम्मीद बनी थी, लेकिन अब स्थायी बंदी के फैसले के साथ उन संभावनाओं पर विराम लग गया है।
धनबाद से हावड़ा के बीच यह सेवा शुरू होना रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयोग था। एसी सुविधा और डबल डेकर संरचना इसकी प्रमुख विशेषताएं थीं। परिचालन बंद होने के बाद भी ट्रेन करीब 11 से 12 वर्षों तक यार्ड में खड़ी रही और इसके भविष्य को लेकर कोई अंतिम स्थिति सामने नहीं आई थी।
अब रेलवे बोर्ड की अनुमति के आधार पर पूर्व रेलवे ने इसे सेवा से पूरी तरह हटाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। स्क्रैपिंग की तैयारी पूरी होने के बाद धनबाद-हावड़ा मार्ग पर शुरू हुई यह विशिष्ट ट्रेन औपचारिक रूप से रेलवे के इतिहास का हिस्सा बन जाएगी।