दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड की गोबिंदपुर पंचायत में करीब 25 लाख रुपये की लागत से बना गोबर गैस संयंत्र निर्माण के लगभग दो साल बाद भी चालू नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि संयंत्र तैयार होने के बावजूद किसी घर तक गैस की आपूर्ति शुरू नहीं हुई है।
यह संयंत्र पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के दुमका प्रमंडल-1 ने स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के दूसरे चरण के तहत बनवाया था। योजना के अनुसार, गोबिंदपुर गांव के 25 परिवारों को घरेलू उपयोग के लिए गोबर गैस उपलब्ध कराई जानी थी। ग्रामीणों के मुताबिक, अब तक केवल 13 परिवारों के घर पाइपलाइन से जोड़े गए हैं।
संयंत्र के लिए करीब 12 फीट गहरा और चौड़ा गड्ढा बनाकर उसे सीमेंट से तैयार किया गया है तथा ऊपर लोहे का ड्रम लगाया गया है। इसके पास गोबर का घोल बनाने के लिए सीमेंट का टैंक भी बनाया गया। पानी की व्यवस्था के उद्देश्य से चापानल और बिजली से चलने वाली मोटर लगाई गई है।
ग्रामीणों का दावा है कि मोटर के लिए अभी तक बिजली कनेक्शन नहीं दिया गया। उनका यह भी कहना है कि निर्माण के बाद संयंत्र उन्हें सौंपा नहीं गया और संचालन तथा रखरखाव की प्रक्रिया समझाने के लिए कोई विस्तृत बैठक भी नहीं हुई। इन कारणों से तैयार ढांचा उपयोग में नहीं आ पाया है।
योजना में गैस कनेक्शन लेने वाले प्रत्येक परिवार की ओर से प्रतिदिन एक टोकरी गोबर उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया है। इसका उद्देश्य गांव के परिवारों को वैकल्पिक ईंधन देना और परंपरागत ईंधन पर होने वाला खर्च कम करना था। ग्रामीणों के अनुसार, रानीश्वर प्रखंड में इस योजना का यह अकेला गोबर गैस संयंत्र है।
स्थानीय लोगों ने संयंत्र को नियमित रूप से चालू कर घरों तक गैस पहुंचाने की मांग की है। उपलब्ध विवरण में विभाग की ओर से संयंत्र शुरू नहीं होने का कारण या इसे चालू करने की समयसीमा नहीं बताई गई है। ऐसे में बिजली कनेक्शन, हस्तांतरण और संचालन व्यवस्था पूरी होने को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।