पूर्वी सिंहभूम के धालभूमगढ़ में एयरपोर्ट विकसित करने के लिए लगभग 540 एकड़ भूमि का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। पहले यह परियोजना करीब 240 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना थी, लेकिन भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित दायरा बढ़ाया गया है। परियोजना अभी स्वीकृति और समन्वय की प्रक्रिया में है।
झारखंड का नागर विमानन विभाग इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, वन विभाग और केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर रहा है। विभाग भूमि की उपलब्धता, तकनीकी आवश्यकताओं, आधारभूत संरचना तथा अलग-अलग विभागों से जरूरी मंजूरियों से जुड़े विषयों को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
प्रस्तावित स्थल का भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की टीम और रांची एयर ट्रैफिक कंट्रोल के अधिकारियों ने निरीक्षण भी किया है। राज्य सरकार ने केंद्र की ओर से मांगी गई 19 बिंदुओं की जानकारी का जवाब भेजने के साथ वन और गैर-वन भूमि का सीमांकन पूरा कर संबंधित अनापत्ति प्रमाणपत्र भी प्रेषित किया है।
परियोजना के सामने वन भूमि और हाथी गलियारे से जुड़े पर्यावरणीय विषय महत्वपूर्ण हैं। हाथियों के प्राकृतिक आवागमन को ध्यान में रखते हुए गलियारे का नए सिरे से सर्वे कराने की पहल की गई है। निर्माण की योजना को वन और वन्यजीव संरक्षण से संबंधित केंद्रीय मानकों के अनुरूप आगे बढ़ाना होगा।
राज्य के नागर विमानन विभाग के निदेशक (परिचालन) कैप्टन एसपी सिन्हा के अनुसार, संबंधित विभागों और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के साथ बातचीत जारी है। भूमि, वन और पर्यावरण से जुड़ी प्रक्रियाएं आगे बढ़ी हैं, लेकिन परियोजना के अगले चरण का काम केंद्र से आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद ही शुरू हो सकेगा।
धालभूमगढ़ के साथ साहिबगंज में भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए नागर विमानन विभाग संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर रहा है। साहिबगंज की योजना आगे बढ़ने पर संथाल परगना के लिए हवाई संपर्क की संभावना बढ़ेगी। राज्य में दुमका, हजारीबाग, डालटनगंज और चाईबासा को हवाई नेटवर्क से जोड़ने से संबंधित योजनाओं पर भी अलग-अलग स्तर पर काम चल रहा है।